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सरसों बेचने के लिए ढेरियों पर सो रहे किसान, रात को काट रहे मच्छर, ढाबे पर रोटी खाने को मजबूर

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अमर उजाला ब्यूरो
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महेंद्रगढ़। सरकारी खरीद की लचर व्यवस्था होने के कारण किसानों को सरसों बेचने के लिए से दो से तीन दिन मंडी में बिताने पड़ रहे हैं। किसानों ने कहा कि रातभर मंडी में रहने को मजबूर हैं। यहां रात के समय सरसों की ढेरी पर ही सो रहे हैं। रातभर मच्छर काटते रहते हैं। खाने के लिए आसपास कोई व्यवस्था नहीं है। ढाबों पर जाकर किसानों को खाने के लिए खर्च करना पड़ रहा है। बुधवार को महेंद्रगढ़ की अनाज मंडी में कुछ ऐसे हालात देखने को मिले। अमर उजाला टीम ने बुधवार दोपहर लगभग पौने एक बजे महेंद्रगढ़ अनाज मंडी में सरसों की खरीद को लेकर व्यवस्थाओं की पड़ताल की। इस दौरान किसान ट्रैक्टर-ट्राली में भरकर अपनी सरसों लेकर आ रहे थे।

मंडी में अपनी सरसों को उतार रहे अशोक गड़ानिया ने कहा कि मंडी में किसी प्रकार की सुविधा नहीं है। दो दिन से किसान मंडी में पड़े हुए हैं। यहां रात को मच्छर काटते हैं। परिवार के पांच लोग आए हुए हैं। रोजाना खाने पर ही 400-500 रुपये खर्च हो रहे हैं। किसान एसडीएम को अपनी समस्या सुुनाते हुए बोले आढ़ती सहयोग नहीं कर रहे। चाय पानी तो दूर सरसों सुखाने के लिए खाली पीपा मांगा था। आढ़ती ने यह पीपा भी नहीं दिया। इस दौरान टीम ने मंडी में किसानों की हर स्तर पर दुर्दशा मिली। किसानों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं मिली। अधिकतर किसानों को सरसों बेचने के लिए दो से तीन दिन लगाने पड़ रहे हैं।
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दूसरी ढेरी के पास खड़े बलाना गांव के निवासी शीशराम बोले हमें मजदूरी करनी पड़ रही है। सरसों की उतरवाई के लिए तीन रुपये प्रति बैग देने पड़ रहे हैं। सरसों की सफाई, भराई के लिए 6 रुपये प्रति बैग देने पड़ते हैं। इसके अलावा सरसों को सुखाने से भी खुद ही काम करना पड़ रहा है।

एसडीएम के सामने गिड़गिड़ाने की मुद्रा में खड़े मालड़ा निवासी श्रीनिवास बोले एसडीएम साहब हमने गिरदावरी कराई थी। अब ऑनलाइन गिरदावरी नहीं दिख रही। पांच एकड़ में सरसों की बिजाई कर रखी है।

सुरेंद्र यादव ने भी मंडी में पहुंचे एसडीएम विनेश कुमार को कहा कि हमारे परिवार ने 12 एकड़ की गिरदावरी कराई थी। ई दिशा केंद्र में कागज भी जमा कराए थे। अब अधिकारी ऑनलाइन गिरदावरी नहीं बता रहे।

गांव पाल निवासी दयाराम ने कहा कि तीन दिन पहले सरसों लेकर आया था। एक अप्रैल को सरसों में 8.4 प्रतिशत नमी बताई थी। अब बोले तुमने पुरानी सरसों मिला रखी है। सरसों की उतरवाई में ही 700 रुपये लग गए। अब परेशान होकर खुद उसकी सफाई कराई है। अब पता नहीं सरसों बिकेगी या नहीं।

गांव बलाना निवासी सतबीर ने कहा कि उसने स्वयं सरसों उतारी है। अब उसे सुखा रहे हैं। तीन दिन हो गए। पता नहीं सरसों कब बिकेगी। सरसों को लेकर हम परेशान हो रहे हैं। पता नहीं सरसों उगाकर गलती कर दी। सरसों खरीद के लिए व्यवस्था बेहद खराब है।
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दुलोठ निवासी शेर सिंह बोले 700 रुपये खर्च कर एक ट्राली सरसों उतरवाई है। अब उसे सुखा रहा हूं। सरसों की तुलाई-भराई की जिम्मेदारी भी मेरी है। सरसों की खरीद के लिए सरकार की ओर से व्यवस्था ठीक नहीं है।
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