अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। प्रदेश में खसरा व गिरदावरी पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से हो इसके लिए सरकार ने पुख्ता कदम उठाए हैं। हर जिले की एक तहसील क्षेत्र में पटवारी मौके पर जाकर टैबलेट के माध्यम से गिरदावरी का काम करेंगे। इस प्रणाली से गलत गिरदावरी की शिकायत पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। इसके लिए सोमवार को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र में पटवारियों को प्रशिक्षण दिया गया।
जिला सूचना विज्ञान अधिकारी जैनेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जिले में नारनौल तहसील के सभी 96 गांवों की गिरदावरी टैबलेट के माध्यम से ऑनलाइन होगी। पटवारियों को अच्छी तरह से प्रशिक्षण दिया गया है। किसी पटवारी को फिर भी कोई तकनीकी समस्या होगी तो वो एनआईसी में आकर शंका दूर कर सकता है। अग्रवाल ने बताया कि पटवारी को फसलों की गिरदावरी के लिए प्रत्येक खसरे पर जाना होगा। खेत में कौन सी फसल बोई गई है। इसका पूरा ब्योरा मौके पर ही भरना होगा। यह गिरदावरी तभी पूरी होगी जब अपने साथ टैबलेट के माध्यम से फोटो लेकर ऑनलाइन अपलोड करेगा। प्रत्येक टैबलेट में संबंधित तहसील की पूरी जमीन का रिकार्ड पहले से ही दर्ज होगा। पटवारी को केवल संबंधित खसरे पर जाकर एक क्लिक करना है। जिसके साथ ही गिरदावरी पूरी हो जाएगी। पहले लगातार ये शिकायतें मिलती रही हैं कि पटवारी ने खेत का दौरा किए बिना ही फसल का ब्यौरा दर्ज कर दिया। इस तरह से फसल के खराब होने की सूरत में मुआवजा देेते समय बड़ी समस्या होती थी। इसी के समाधान के लिए सरकार ने सभी जिलों की एक-एक तहसील में टैबलेट के माध्यम से गिरदावरी रिपोर्ट ऑनलाइन तैयार करवाने का काम शुरू किया है।
आसान है प्रक्रिया
डीआईओ ने बताया कि ई-खसरा गिरदावरी की प्रक्रिया बहुत आसान है। पटवारी जिस भी भूमि पर जाएंगे वे टैबलेट में जीपीएस ऑन करके खेवट नंबर आदि डालकर फसल का पूर्ण विवरण फोटो सहित डालेंगे। टैबलेट लोकेशन उठाएगा तथा पटवारी फसल पूर्ण विवरण डालेंगे। ई-खसरा गिरदावरी होने उपरांत टेब का डाटा ऑनलाइन डाला जाएगा। जिसे कोई भी व्यक्ति देख सकता है।