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नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशीप में संदीप कुमार ने जीता गोल्ड

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नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में संदीप कुमार ने जीता गोल्ड
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सतनाली मंडी। गांव सुरेहती जाखल के संदीप कुमार 50 किलोमीटर रेस वॉक में गोल्ड मेडल जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया। दिल्ली में आयोजित पांचवीं राष्ट्रीय पैदल चाल प्रतियोगिता में शनिवार को यह उपलब्धि हासिल की है।
संदीप ने फोन पर बताया कि
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से पांचवीं राष्ट्रीय पैदल चाल प्रतियोगिता दिल्ली में आयोजित की गई थी। संदीप ने हरियाणा का प्रतिनिधित्व करते हुए 3 घंटा 56 मिनट 39:71 सेकेंड में 50 किलोमीटर की पैदल चाल पूरा कर गोल्ड मेडल जीता। संदीप ने बताया कि उनका लक्ष्य 2020 ओलंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करना है। संदीप ने बताया कि वैसे तो उनका लक्ष्य 2020 के ओलंपिक खेलो में गोल्ड जीतना है। किंतु इससे पहले मई महीने में चाइना में आयोजित होने वाली वर्ल्ड वार्किंग चैंपियनशिप पर तथा इंडोनेशिया में अगस्त माह में आयोजित होने वाले खेलों पूरा फोकस रहेगा।
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ये जीते पुरस्कार
पिछले वर्ष फरवरी में दिल्ली में चतुर्थ नेशनल ओपन रेस वाकिंग चैंपियनशीप में 50 किलोमीटर पैदल चाल में नेशनल रिकार्ड बनाते हुए 3 घंटे 55 मिनट 59.5 सेकेंड में पूरी कर स्वर्ण पदक, जून में पंजाब के पटियाला में आयोजित 21 वें फैडरेशन कप नैशनल सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप प्रतियोगिता में 20 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा में 1 घंटा 27 मिनट 43.28 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। जुलाई में आंध्रप्रदेश के गुंटूर में नेशनल इंटर स्टेट चैंपियनशिप में 20 किलोमीटर रेस वॉक में गोल्ड मेडल तथा अगस्त में बंगलुरु में आयोजित सर्विसेज गेम्स में ब्रॉंज मेडल, चैन्नई में नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 20 किलोमीटर पैदल चाल में सिल्वर मैडल पर कब्जा जमाया। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016-17 के लिए संदीप कुमार को खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर भीम अवार्ड से सम्मानित किया। संदीप को इस उपलब्धि पर कस्बे सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोगों ने बधाई दी है।
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बेटे पर है गर्व: संदीप के पिता प्रीतम ने बताया कि जब वह आठ वर्ष का था तब उसकी मां का देहांत हो गया था। इसके बाद उन्होंने खेती के साथ बच्चों का पालन पोषण किया। घर पर संदीप की बहन कुंवारी थी वो ही उनको खाना पका कर देती थी। उसकी शादी के बाद रोटी बनाने की समस्या पैदा हो गई। कभी वह स्वयं तो कभी बड़ा बेटा सुरेंद्र खाना पका कर संदीप को खिलाते थे। पिता ने बेटे को इस लायक बनाने के लिए काफी संघर्ष किया है। उन्होंने बताया कि अब वह देश एवं विदेश में क्षेत्र का नाम रोशन कर रहा है। उसे अपने बेटे पर गर्व है।
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