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डेंगू की जिला में हुई दस्तक, निजी अस्पताल में एक गांव के आये सात मरीज

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डेंगू की जिले में दस्तक, निजी अस्पताल में एक गांव के आए सात मरीज
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। अगस्त के दूसरे पखवाड़े में नारनौल में डेंगू ने दस्तक दे दी है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग बेपरवाह बना हुआ है। अधिकारी डेंगू या मलेरिया के रोकथाम पर ध्यान नहीं दे रहे। शहर में नगर परिषद फॉगिंग नहीं करवा रही। ऐसे में यदि डेंगू या मलेरिया फैलता है तो स्थिति बेकाबू हो जाएगी। यहां के गांव कोरियावास में डेंगू के सात मरीज मिले हैं। उनकी पुष्टी एक निजी अस्पताल ने की। गत दो साल पूर्व भी कोरियावास, रामबास और निजामपुर क्षेत्र के गांवों में ही डेंगू के मरीज मिलने की शुरुआत हुई थी। उसके बाद तेजी से डेंगू पूरे जिले में फैला था। इसकी सूचना निजी चिकित्सक ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी दे दी है।
महेंद्रगढ़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में तीन अगस्त को गांव कोरियावास का युवा बीमार होने के बाद उपचार के लिए भर्ती किया गया था। इसकी जांच के बाद चिकित्सकों ने उसमें डेंगू की पुष्टी की थी। इसके अगले दिन ही चार अगस्त को कोरियावास के ही एक अन्य व्यक्ति को भर्ती किया गया। इसमें भी डेंगू पाजिटिव पाया गया। इसके बाद 14 अगस्त को एक युवती को इसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। चिकित्सकों ने इसमें भी डेंगू की पुष्टि की। डेंगू के मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या को देख चिकित्सक ने अस्पताल नर्स और स्टाफ सदस्यों से उन सभी मरीजों की जानकारी ली। इसके बाद चिकित्सक को पता लगा की सभी डेंगू पीड़ित मरीज एक ही गांव के हैं। इस के बाद चिकित्सक ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दे दी। इन मरीजों के ठीक होने के बाद निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने उन्हें छुट्टी भी दे दी। बताया जा रहा है कि गांव से डेंगू के मरीज लगातार सामने आ रहे हैं।
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गांव में लगातार बढ़ रहे डेंगू के मरीज
गांव कोरियावास में अभी तक सात लोगों में डेंगू पाजिटिव मिला है। इनमें से तीन मरीजों को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। डेंगू के चार मरीजों का आज भी महेंद्रगढ़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है।

किशोर हो रहे ज्यादा शिकार
निजी अस्पताल में भर्ती सभी मरीज गांव कोरियावास के ही है। इनमें 16 वर्षीय अंजली पुत्री कृष्ण कुमार, 16 वर्षीय निशा पुत्री अतर सिंह, 18 वर्षीय सोनू पुत्र लालचंद और दीपक पुत्र कंवर सिंह का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

सूचना के बाद गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
निजी चिकित्सक की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम 10 और 11 अगस्त को गांव कोरियावास पहुंची। वहां उन्होंने डेंगू की पुष्टि के लिए गांव के बीमार लोगों की जांच की, लेकिन कोई भी व्यक्ति पाजिटिव नहीं मिला। इससे पूर्व टीम निजी अस्पताल भी पहुंची, जहां टीम ने उपचाराधीन मरीजों से जानकारी ली। उनकी रिपोर्ट भी देखी।

मरीजों ने सरकारी लैब में जांच करवाने से किया इंकार
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निजी अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों के परिजनों से अच्छे और सस्ते उपचार के लिए उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाने के साथ ही सरकारी लैब में इन मरीजों की जांच करवाने के लिए कहा। इस दौरान टीम ने मरीजों के परिजनों को बताया कि सरकारी अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए अलग से वार्ड की व्यवस्था है। अस्पताल में मरीजों की सभी प्रकार की जांच भी हो जाएगी। इसके बाद भी मरीजों के परिजनों ने सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने से इंकार कर दिया।
बिना लैब में जांच के पाजिटिव पुष्टि नहीं
डेंगू और मलेरिया विभाग के इंचार्ज उप सिविल सर्जन डॉ. धर्मेंद्र सैनी ने बताया कि सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में जाकर संभावित लोगों की जांच की, लेकिन किसी भी व्यक्ति में डेंगू की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों की सरकारी अस्पताल की लैब में आने वाली जांच के आधार पर ही पुष्टि हो सकती है। लेकिन, सभी मरीजों ने सरकारी अस्पताल की लैब में जांच करवाने से इंकार कर दिया है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग इन मरीजों को डेंगू पाजिटिव नहीं मान सकता है।

डेंगू पाजिटिव के लिए होती हैं दो जांच
डेंगू पाजिटिव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो जांच की जाती है। इसमें प्रथम चरण में एनएस-1 जांच होती है। अगर पहली जांच सही पाई जाती है तो भी मरीजों को पाजिटिव नहीं माना जा सकता है। इसके बाद संभावित मरीज की एलीना जांच की जाती है। जोकि मेडिकल कालेजों में होती है। वहां से आने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही मरीज में डेंगू पाजिटिव की पुष्टि हो पाती हैं।
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मेरी गांव में एक युवक को डेंगू की पुष्टि हुई है। कई लोग बीमार हैं, जो निजी अस्पताल में जांच करा रहे हैं। उन्होंने अपने लेवल पर गांव में साफ-सफाई करवाई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी गांव में आई थी।
-राजाराम, सरपंच, गांव कोरियावास
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