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भूख हड़ताल बैठे उप प्रधान तबीयत बिगड़ी,सीएमओ ने 49 कर्मचारियों को किया टर्मिनेट

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल 17 वें जारी रही। अनशनकारियों की तीसरे दिन उपप्रधान अशोक, महेश यादव, देवदत्त और राकेश लांबा ने 72 घंटे की भूख हड़ताल जारी रखी। अशोक की तबीयत खराब हो गई। प्रशासन की ओर से देर से अधिकारी पहुंचे। इस पर प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरना स्थल पर नागरिक अस्पताल से डॉ. सुरेंद्र की टीम अनशनकारियों का चेकअप किया। अशोक की अस्पताल में भर्ती करने को कहा लेकिन लेकिन अशोक ने धरना स्थल छोड़ने से मनाकर दिया। दूसरी ओर सीएमओ ने डीसी से 49 कर्मचारियों को टर्मिनेट कर दिया है।
जिला प्रधान डॉ. पुष्पेंद्र ने वीरवार को आयुष्मान भारत योजना की पोल खोली। उन्होंने बताया कि छह महीने में अभी तक जिले में केवल 57 लाभार्थियों को लाभ मिला है। जिसमें आयुषमान कार्ड गरीबी रेखा से नीचे के बनने चाहिए थे। लेकिन, सरकार ने अपात्र के भी आयुषमान कार्ड बना दिए हैं। नारनौल शहर में निजी अस्पताल में आयुषमान के तहत गरीबों का इलाज नहीं हो रहा है। जिला महासचिव विनोद राव ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री द्वारा झूठा प्रचार किया जा रहा है। कर्मचारियों को जून से अभी तक तनख्वाह नहीं मिली और न ही कोई सरकार ने हमारी बात मानी है। सरकार द्वारा मांग न मानने पर तीन दिनों के लिए भूख हड़ताल बढ़ा दी गई है। सरकार द्वारा मांग नहीं मानी गई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाऐंगे। इस मौके पर महावीर सिंह, शिव कुमार, महेश यादव, डॉ. सुचिता, डॉ. सोनिया, डॉ. अमित, नितेश बंसल, कपिल, प्रवीण कुमारी, सोमवती, राजेंद्र पाल, कपिल, अशोक, डॉ. सहदेव, सुनील कुमारी, स्नेहलता, सुशीला देवी, सरीता शर्मा, सुनीता यादव, सुनीता, सुनीता कुमारी, सरिता देवी, कैलाश, संगीता, सुषमा और प्रोमिला सहित अन्य कर्मचारी मौजूद थे।
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दो वर्ष में 10 बार हड़ताल पर जा चुके हैं कर्मचारी : सीएमओ
हरियाणा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कुछ कर्मचारी पांच फरवरी से असंवैधानिक रूप से हड़ताल पर हैं। कर्मचारी दो वर्ष में लगभग 10 बार हड़ताल पर जा चुके हैं। कर्मचारी अपने अड़ियल रवैये को त्यागते हुए तुरंत काम पर लौटे। जिन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी, उन्हें दोबारा नहीं लिया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि एनएचएम के कर्मचारियों को सर्विस सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक जनवरी 2018 से सर्विस बायलॉज बना दिए गए हैं। वेतन विसंगतियों पर विचार करते हुए मुख्यमंत्री स्तर पर दूर कर दी गई हैं। सरकार पर प्रति वर्ष 110 करोड़ रुपये का वित्तीय भार बढ़ा है। कर्मचारियों को बार-बार समझाए जाने के बावजूद भी कर्मचारी सेवाओं पर दोबारा नहीं लौट रहे हैं। 21 फरवरी तक जिला में कुल 324 कर्मचारियों में से 237 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए 49 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। एनएचएम के तहत एसएनसीयू, लेबर रूम तथा आपातकालीन सेवाओं को जिला में कार्यरत नियमित कर्मचारियों के माध्यम से सुचारु रूप से चल रही है। एंबुलेंस पर नियमित चालकों, हरियाणा रोडवेज व आउटसोर्सिंग से चालकों का प्रबंध कर लिया गया है।
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