किसानों का पांच लाख रुपये का हुआ नुकसान
फोटो संख्या : 35 से 41
अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। गांव झुक के पास महेंद्रगढ़ डिस्ट्रीब्यूटरी नहर के टूटने से किसानों की 50 एकड़ खेतों में बोई हुई सरसों की फसल खराब हो गई। सोमवार को किसानों ने नहर विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और मुआवजा देने की मांग की।
किसान अभय सिंह, जिले सिंह, बृजलाल, रोशनलाल, बीर सिंह, महीपाल, रामचंद, जगदीश, विश्वजीत, करतार, कृष्ण महीपाल, राजेंद आदि ने बताया कि उन्होंने अपनी जमीन पर कुछ दिन पहले सरसों की बुआई की थी। इस पर हजारों रुपये का खर्च आया था। रविवार को नहर में पानी का बहाव बहुत तेज था। निरीक्षण के दौरान आए एसडीओ को पानी रुकवाने के लिए कहा था किंतु उन्होंने नहीं रुकवाई। थोड़ी ही देर में नहर टूट गई उसके बाद 50 एकड़ जमीन जलमग्न हो गई। एक ट्यूबवेल भी पानी से भर गया। पांच दिन पहले भी नहर टूट गई थी उसके बाद भी विभाग नहर को लेकर ज्यादा सचेत नहीं है। किसानों ने बताया कि प्रशासन गांव खैरोली तक पानी पहुंचना चाहता है, उसी कारण नहर का बहाव फूल कर दिया जाता है जिससे नहर टूट जाती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नहर के टूटने के समय एसडीओ और जेई निरीक्षण के लिए वहां आए हुए थे। उनको नहर का बहाव कम कराने वाले के लिए कहा भी गया था किंतु उनका कहना था कि उन पर राजनीति दबाव है और पानी को गांव खैरोली तक पहुंचना है। वहां पर पानी नहीं पहुंच पाता है। उन्होंने नहर का बहाव कम नहीं करवाया और कुछ मिनटों बाद ही नहर टूट गई।
लगभग पांच लाख रुपये का हुआ नुकसान
किसानों ने बताया कि नहर टूटने से खेतों में पानी भर जाने से लगभग एक दर्जन किसानों को पांच लाख रुपये का नुकसान हो गया। उन्होंने बताया कि एक एकड़ जमीन को बोने में लगभग 8 हजार रुपये का खर्चा आता है। उन्होंने बताया कि अब 15 दिनों तक जमीन नहीं सूखने वाली है। इससे दोबारा बिजाई देरी से ही होगी। उन्होंने बताया कि पानी के कारण डेढ़ लाख रुपये का ट्यूबवेल भी खराब हो गया।
नहीं हुई नहर की मरम्मत
किसानों ने बताया कि महेंद्रगढ़ डिस्ट्रीब्यूट्री, पाथेड़ा पंप हाउस से निकल कर बैैरावास गांव तक जाती है। इस नहर से कई गांवों को पानी मिलता है। इस नहर का निर्माण 1976 में किया गया था उसके बाद से अभी तक नहर की एक बार भी रिपयेर नहीं करवाई जबकि नहर जर्जर हो चुकी है। उन्होंने बताया कि साल में नहर की छटाई दो बार की जाती है किंतु यह छटाई मात्र दो किलोमीटर तक पूरी की जाती है।
-------------------------
हमाने गांव में नहर टूट गई जिससे गांव के किसानों की 50 एकड़ भूमि में बोई गई फसल खराब हो गई। बिजाई में लगभग 8 हजार रुपये प्रति एकड़ का खर्चा आता है। इसलिए उन्हें खराब हुई फसल का मुआवजा मिलना चाहिए।
-जिले सिंह, किसान
-----
नहर दो बार टूट चुकी हैं, मेरे कुएं में पानी भर गया। ट्यूबवैल में पानी जाने से डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हो गया। जब नहर टूटी तो एसडीओ और जेई मौके पर थी। अधिकारियों को पानी का बहाव करने के लिए कहा भी गया था किंतु वो नहीं माने।
-बीरेंद्र सिंह, किसान
-----
पानी को आगे तक पहुंचाने के चक्कर में नहर में उसकी क्षमता से अधिक पानी छोड़ दिया गया जिससे नहर टूट गई। लगभग 40 वर्ष पुरानी नहर है जो अब जर्जर हो चुकी है और प्रशासन को इसकी मरमत करवानी चाहिए ताकि भविष्य में नहर दोबार न टूटे।
-बीर सिंह, किसान
-----------------
वर्ष में चार बार नहर टूट जाती है जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। प्रशासन जल्द रिपयेरिंग करवाने का आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लेती है जबकि अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
- हरी सिंह, किसान
------------------
आज निरीक्षण पर गया था। वहां पर पानी ठीक तरीके से चल रहा था कि अचानक नहर टूट गई। उसके बाद पानी को बंद करवा दिया गया था। नहर टूटने का मुख्य कारण पेड़ों की जड़ें नहरों में निकल आना और नहर की सफाई नहीं होना रही थी। 15 दिन में नहरों की सफाई करवा दी जाएगी। टूटी हुई नहर की भी जल्द ही मरमत करवा दी जाएगी।
-शमशेर सिंह, एसडीओ सिचाई विभाग महेंद्रगढ़।