अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। सब्जीमंडी के आढ़ती गोंविद सैनी 30 वर्षों से श्रीआदर्श रामलीला कमेटी से जुड़े हुए हैं। 15 वर्ष की उम्र में रामलीला से जुड़े गोविंद ने मंत्री, जामवंत, खरदूषण की भूमिका निभाई। चार वर्ष बाद रामलीला कमेटी ने उन्हें हनुमान का रोल दे दिया। इसके बाद 26 वर्षों से वे आदर्शन रामलीला में हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। गोविंद सैनी 48 वर्ष की उम्र में भी राम-लखन को अपने कंधों पर उठाकर लंका तक लेकर जाते हैं। उनके दमदार अभिनय से दर्शक भी प्रभावित हैं। गोविंद सैनी ने बताया कि वे हनुमानजी के परम भक्त हैं और बचपन से ही उनका व्रत रख रहे हैं। जब वे हनुमान जी की भूमिका निभाते हैं, उनके अंदर आस्था की लहरें हिलोरे लेने लगती हैं। उन्होंने बताया कि रामलीला में अब बहुत कुछ बदलाव आया है। पहले माता-बहनें बड़ी संख्या में रामलीला देखने आती थी। युवा भी आते थे, लेकिन अब युवाओं का रुझान रामलीला के प्रति कम हो गया है।
स्कूल के चपरासी ने किया था प्रेरित
गोविंद सैनी को रामलीला के प्रति प्रेरित करने वाले रामनाथ कानोडिया थे। गोविंद सैनी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय महेंद्रगढ़ में आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। राम नाथ उस स्कूल में चपरासी थे। रामनाथ स्वयं श्रीराम का रोल करते थे। जब वो स्कूल में जाते तो बच्चों को रामलीला की अच्छी-अच्छी बातें बताते थे। उन्हीं से प्रेरित होकर रामलीला में रावण के मंत्री से रोल की शुरुआत की। चार वर्ष तक जामवंत, खरदूषण, पिशाचराज आदि का रोल करते रहे।
ब्रह्मचर्य का करते हैं पालन
गोविंद सैनी हनुमान का रोल केवल मंचन के लिए ही नहीं करते, बल्कि हनुमान की भांति ब्रह्मचर्य का पालन भी करते हैं। रामलीला की रिहर्सल दो महीने पहले ही शुरू कर दी जाती है। तब से लेकर रामलीला के खत्म होने के बाद तक वो ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। दशहरे के बाद सालासर धाम के दर्शन कर ही वह इस नियम को विराम देते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने 15 वर्ष की उम्र से मंगलवार का व्रत भी शुरू कर दिया था। यह व्रत वे अभी तक करते आ रहे हैं।
हनुमानजी में हैं अद्भूत शक्ति
गोविंद सैनी ने बताया कि बजरंगबली में अद्भूत शक्ति हैं। उन्होंने बताया कि 8 वर्ष पूर्व रामलीला देखने आए कुछ दर्शकों का आपस में झगड़ा हो गया था। उनको रोकते समय पैर पर लकड़ी लग गई। इससे पैर की हालत खराब हो गई। बजरंगबली के आशीर्वाद से उन्होंने अपना रोल जारी रखा। बाद में चिकित्सकों ने उनके पैर का ऑपरेशन भी बोल दिया था। चोट के कारण दो मंगलवार व्रत अवश्य छोड़ दिए थे। लेकिन, किसी बड़े बुजुर्ग ने उन्हें समझाया कि वो बजरंगबली के व्रत वापस शुरू करें। तभी उन्होंने दोबार से व्रत शुरू कर दिए और आज उनका पैर बिल्कुल ठीक हैं। उन्होंने पैर का कोई ऑपरेशन नहीं करवाया।