महेंद्रगढ़। सरसों बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। किसान पंजीकरण के लिए रोजाना मार्केट कमेटी के कार्यालय में चक्कर लगा रहे हैं। किसानों को पंजीकरण कराने के बारे में अधिकारियों की ओर से एक टोल फ्री नंबर दिया जा रहा है। किसानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण सबसे बड़ी समस्या बन गया है। किसानों ने जनवरी महीने में पंजीकरण कराया था। अब किसान गेट पास लेने के लिए पहुंच रहे हैैं तो पता लगा कि उनका ऑनलाइन पंजीकरण नहीं हुुआ है। किसानों के पास पंजीकरण कराने के विकल्प भी खत्म हो चुके हैं। इसके अलावा जिन किसानों ने अप्रैल महीने में दूसरे चरण में आवेदन जमा कराए थे उनका पंजीकरण भी नहीं हो सका। ऐसे में किसानों को दोहरी मार पड़ रही है। किसानों की समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। मार्केट कमेटी के कर्मचारी साइट बंद होने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। किसानों को कभी पटवारी कभी कृषि विभाग, कभी नगर पालिका के चक्कर लगवा रहे हैं।
तीन महीने पहले पंजीकरण कराया था। अधिकारियों ने कहा पंजीकरण नहीं हुआ है। 10 अप्रैल को दोबारा से फार्म जमा कराया था। अब मार्केट कमेटी के कर्मचारी कह रहे हैं कि चंडीगढ़ से साइट बंद होने के कारण पंजीकरण नहीं हो पा रहा।दस एकड़ में सरसों बुुआई की थी। अब क्या करें। - जगदीश, गांव राजाबास
धर्मबीर के नाम से दस एकड़ का पंजीकरण कराया था। अब मार्केट कमेटी के रिकार्ड में कुछ नहीं दिख रहा। कभी मार्केट कमेटी, कभी नगर पालिका, कभी पटवारी और कभी कृषि विभाग में चक्कर लगवा रहे हैं। कोई अधिकारी हमारी समस्या नहीं सुन रहा। टोल फ्री नंबर पर कोई जवाब नहीं दे रहा। - नरेंद्र , किसान
हमने रतन, योगेश , सुशीला, सरोज के नाम से पंजीकरण कराया था। 16 एकड़ में सरसों की बिजाई की थी। अब सरसों को कहां लेकर जाएंगे। किसी के नाम से पंजीकरण नहीं दिखाया जा रहा। कोई अधिकारी नहीं मिल रहा। ऑनलाइन का नाम लेकर सभी पल्ला झ़ाड रहे हैं। रतन , किसान
विनोद, सुमित्रा, राजेश , योगेंद्र के नाम से पंजीकरण कराय था। 18 एकड़ में सरसों की बिजाई थी। जब सरसों लेकर मंडी में पहुंचे तो यहां गेट पास काटने से इनकार कर दिया। अब 90 क्विंटल सरसों को कहां बेंचे। अधिकारी टोल फ्री नंबर दे रहे हैं।इस टोल फ्री नंबर पर कोई जवाब नहीं मिल पा रहा। - योगेंद्र, किसान