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हैवी ब्लास्टिंग और डस्ट से ग्रामीणों का जीना हुआ मुश्किल, प्रशासन बना मुकदर्शक

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अमर उजाला ब्यूरो
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नांगल चौधरी (नारनौल)।
बखरीजा माइंस में हैवी ब्लास्टिंग तथा क्रशरों की डस्ट ने ग्रामीणों का जीना दुर्भर कर दिया। समाधान के लिए ग्रामीण पिछले तीन दिन से धरने पर बैठे हैं। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने अभी तक सुध नहीं ली है। इससे प्रशासनिक मिलीभगत का अंदाजा लगाना सहज है।
बुधवार को धरना स्थल पर पहुंचे कांग्रेसी नेता अभिमन्यु राव ने कहा कि क्रेशर जोन के पास गांव मेघोत बींजा, धोलेड़ा, बिगोपुर के ग्रामीणों का जीवन नारकीय बना हुआ है। डस्ट उड़ने से ग्रामीणों को सांस लेना भी मुश्किल हो गया। दूसरी ओर हैवी ब्लास्टिंग से ग्रामीणों को जानलेवा खतरा उत्पन्न हो गया। सरकार को ग्रामीणों की समस्या का तत्परता पूर्वक समाधान करना चाहिए।
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ग्रामीणों ने बताया कि मेघोत बींजा गांव पहाड़ की तलहटी पर है। पहाड़ के इस तरफ मेघात बींजा गांव तथा दूसरी ओर बखरीजा माइंस में पत्थर खनन होता है। अधिक मुनाफा कमाने के लालच में माइंस की गहराई बढ़ा दी। 140 फीट गहरी खदान में हैवी ब्लास्टिंग का इस्तेमाल होता है। जिसकी धड़क से मेघोत बींजा के मकानों में दरार पड़नी शुरू हो गई। जानलेवा हादसे से चिंतित ग्रामीणों ने उपायुक्त व विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंप दिया।
समाधान नहीं होने पर उन्होंने सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई थी। किंतु राजनीतिक दबाव के चलते शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई। जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने 21 मई को बखरीजा जोन में धरना शुरू किया था। तीन दिन बीतने के बावजूद कोई विधायक या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। ऐसे में माइंस संचालक और प्रशासन के बीच सांठगांठ होने की आशंका बढ़ गई।
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ग्रामीणों ने कहा डस्ट के प्रभाव से गांवों में टीबी, दमा, एलर्जी के मरीज बढ़ गए। हजारों एकड़ रकबे पर खेतीबाड़ी प्रभावित हो गई। खरीफ सीजन में बारिश होते ही किसान बीजाई करते हैं। किंतु पत्तों पर डस्ट जमने के कारण पौधा ग्रोथ नहीं करता। फसल नष्ट होने की स्थिति में किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ता है। समाधान को लेकर एकजुट ग्रामीण तीसरे दिन भी धरने पर डटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चार दिन में माइंस व क्रेशरों का निरीक्षण तथा कार्रवाई करनी होगी। इसके बाद अनशन व सड़क जाम की रूपरेखा बनाई जाएगी।
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