46 साल बाद धनतेरस पर बना कलानिधि योग
धनतेरस पर धातु की वस्तु खरीदना माना जाता है शुभ
अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। दीपावली का त्योहार आने वाला है। माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी घर आती है और धन की देवी के स्वागत के लिए हर घर में इसकी तैयारियां भी लगभग अंतिम चरण पर होगी। दीपों का ये त्योहार 17 अक्टूबर को धनतेरस के साथ ही शुरू हो जाएगा। जो 21 अक्टूबर को भैया दूज के साथ समाप्त होगा। धनतेरस पर हर तबके का व्यक्ति कुछ न कुछ नई चीज जरूर खरीदता है। कहा जाता है कि इस खरीदी गई हर चीज के बरकत होती है। आपने अगर पहले से ही योजना बना ली है इस दिन आपको क्या खरीदना है तो भी यहां बताए गए इन 4 चीजों में से एक चीज जरूर खरीदें, क्योंकि ये चीज मां लक्ष्मी को आपके घर आकर्षित करती है। इस बार संयोग 46 साल बाद धनतेरस पर कलानिधि योग बन रहा है। तीन योग एक साथ होने पर कलानिधि योग बनता है। इस दिन प्रदोष काल में की गई पूजा अर्चना से धन वैभव में वृद्धि होती है।
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धनतेरस पर धातु की वस्तु खरीदना माना जाता है शुभ
17 अक्टूबर को धनतेरस है। धनतेरस के दिन सोने-चांदी आदि धातु की चीज खरीदना शुभ माना जाता है और अगर ये चीज शुभ योग में खरीदा जाए तो ये और अधिक फलदायक होता है। अगर आप ज्यादा भारी नहीं खरीद सकते तो एक छोटी सी चम्मच ही खरीद लें और इससे ही देवी लक्ष्मी की पूजा करें। चांदी के लक्ष्मी जी और गणेश जी भी खरीदे जा सकते हैं। पूजन के बाद इन्हें अपनी तिजोरी में रखें और नियमित धूप दीप दिखाएं। इससे आपके धन में वृद्धि होगी। इनके अलावा गणेश लक्ष्मी की मूर्ति, धातु के बर्तन स्टील को छोड़कर, सोना या चांदी के बने आभूषण, श्रीयंत्र स्फाटिक का, झाडू, वस्त्र(काले रंग को छोड़कर), नमक, कोदी शंख, धमिया खंडा, इलेक्ट्रानिक आइटम, मिट्टी के दीपक, गौमती चक्र, कुबेर की फोटो, रुद्राक्ष सात मुखी की खरीदी शुभ मानी जाती है।
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ये रहेगा खरीददारी का शुुभ मुुहूर्त:
खरीददारी के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11.02 बजे से 12.23 बजे तक(लाभ), दोपहर 12.28 बजे से 1.54 बजे तक(अमृत) एवं प्रदोष बेला में शाम 6 बजे से 6.15 बजे तक है। इस दिन पूजा का मुहूर्त शाम 6.04 मिनट से 8.26 बजे तक रहेगा। इस दिन तेरस सूर्य उदय से रात्रि 11.29 बजे तक रहेगी ।
दिवाली पूजन का ये रहेगा शुभ मुहूर्त
धर्म शास्त्रों में दीपावली में लक्ष्मी गणेश पूजन में प्रदोष काल का भी खासा महत्व होता है. दिन-रात के संयोग को ही प्रदोष काल कहते है। इस बार शाम 5.43 से रात 8.16 तक प्रदोषकाल रहेगा। जिसमें लोग सुख-समृद्धि की कामना से लक्ष्मी, गणेश और कुबेर का पूजन कर सकेंगे। जबकि वृषभ काल का शुभ मुहूर्त शाम 7.11 से 9.06 बजे तक रहेगा। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा शुभ मुहूर्त में ही की जानी चाहिए।
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46 वर्ष बाद बना विशेष संयोग
17 अक्टूबर मंगलवार को धन तेरस प्रदोष बेला के साथ है। इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र प्रदोष होने से समय ग्रह स्थिति में वृषभ लग्न से पंचम में शुक्र मंगल एवं चंद्रमा की युति से धन लक्ष्मी योग, वृद्धि योग एवं वत्स योग एक साथ पड़ रहे हैं। इन तीन योग के एक साथ होने से कला निधि योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित रवि दत्त शर्मा के मुताबिक ऐसा संयोग 46 साल बाद बन रहा है। इस योग में महालक्ष्मी पूजन से धन धान्य में वृद्धि के साथ ही सुख समृद्धि भी प्राप्त होती है। धनतेरस पर आरोग्य के देवता धन्वंतरि का जन्म भी समुद्र मंथन से हुआ था। ये आयुर्वेद के जनक माने जाते हैं।
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दीपदान का भी महत्व:
धनतेरस पर यमराज को दीपदान करने से परिवार में अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। इस दिन भगवान कुबेर के साथ महालक्ष्मी का पूजन विधि विधान से किया जाता है।