सर्वर डाउन, जीएसटी रिटर्न फाइल करने में परेशानी
नारनौल। बेशक केंद्र सरकार जीएसटी लागू कर वाहवाही लूट रही हो लेकिन इसका साइड इफेक्ट अभी से व्यापारियों को दिखने लगा है। जीएसटी की रिटर्न फाइल करने में व्यापारी परेशान हैं। व्यापारियों को कहीं मुनीम, तो कहीं सीए चूना लगा रहा है। जीएसटी फाइल करने के अंतिम दिन शनिवार को व्यापारियों को काफी परेशानी हुई। अंतिम दिन मुनीम और सीए के पास व्यापारियों की भीड़ लगी रही। जबकि सर्वर डाउन होने के कारण अनेक व्यापारी अपनी रिटर्न नहीं भर पाये।
शनिवार को जीएसटी फाइल करने के अंतिम दिन सीए और इससे जुड़े मुनीमों के पास व्यापारियों की भीड़ लगी रही। लेकिन सर्वर के डाउन होने के कारण व्यापारी सुबह से शाम तक बैठे रहे। परेशान व्यापारियों ने इसके लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया। व्यापारियों का कहना था कि ऐसे अपनी रिटर्न भरने के लिए हर माह परेशान होना पड़ेगा तो व्यापार चौपट हो जाएगा।
व्यापारियों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
नारनौल शहर में सीए या इस काम से जुड़े अन्य लोग व्यापारी से हर रिटर्न भरने के लिए 600 रुपये ले रहे हैं। इस प्रकार साल में 37 रिटर्न भरी जाने हैं। वहीं तीन हजार माह के अनुसार 36 हजार रुपये का खर्चा व्यापारी का अलग से हो रहा है। साल में जीएसटी की केवल फाइल भरने में व्यापारी को करीब 58 हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे। जबकि व्यापारी यह काम पहले तीन से चार हजार रुपये साल में आसानी से हो जाता था।
मुनीम और सीए कर रहे मनमानी
व्यापारियों ने बताया कि मुनीम और सीए मनमानी कर रहे हैं। कई मुनीम या सीए जीएसटी अकाउंट में व्यापारी के नंबर देने की बजाय खुद के नंबर से रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं तथा फाइल भरते समय आने वाला ओटीपी भी उनके मोबाइल में आता है। ऐसा वे इसलिए कर रहे हैं कि व्यापारी किसी दूसरे सीए या अन्य व्यक्ति के पास न चला जाए।
दो दिन से सीए के पास बैठा हूं। पोर्टल बहुत धीरे चल रहा है। इससे काफी परेशानी हो रही है।
महेश सोनी
जीएसटी के कारण व्यापार प्रभावित हो रहा है। अगर हर माह ऐसा ही रहा तो व्यापार चौपट हो जाएगा।
-जयप्रकाश
सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिये। जीएसटी से व्यापारी को आर्थिक नुकसान बहुत ज्यादा हो रहा है।
-महावीर गर्ग
सीए व मुनीम मनमानी कर रहे हैं। पहले तीन से चार हजार रुपये साल में काम चल जाता था, अब कम से कम 60 हजार रुपये लगेंगे। -शशांक गुप्ता
पोर्टल का सर्वर अंतिम दिनों में ज्यादा लोड होने के कारण धीरे चलने लगता है। इससे अंतिम दिनों में परेशानी होना स्वाभाविक है।
-अमित गर्ग, सीए