आदेशों की उड़ी धज्जियां, बिना हेलमेट पहने कॉलेज पहुंच रहे विद्यार्थी
सुदेश कुमार
नारनौल। यातायात नियमों की सख्ती से पालना करवाने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी व गैर सरकारी कालेजों में बिना हेलमेट के दुपहिया वाहन लेकर आने वाले विद्यार्थियों को कॉलेज में प्रवेश नहीं करने के निर्देश जारी किए हैं। लेकिन विभाग के आदेशों की पालना करवाने में न तो कालेज प्रशासन दिलचस्पी दिखा रहा है और न ही पुलिस प्रशासन। यही कारण है कि कालेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थी बिना हेलमेट पहने ही कालेज कैंपस में पहुंच रहे हैं। ऐसा ही नजारा बुधवार को देखने को मिला, जब दोपहर करीब एक बजे अमर उजाला टीम राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पहुंची। यहां एक के एक बाद छात्र-छात्राएं अपनी स्कूटी व मोटरसाइकिलों पर बिना हेलमेट के तीन-तीन बैठकर यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दिखाई दिए। आधे घंटे के दौरान 15-20 छात्र-छात्राएं मोटरसाइकिल व स्कूटी लेकर कालेज के अंदर व बाहर गए। इनमें से केवल एक-दो ने ही हेलमेट पहना था। इसके बाद टीम राजकीय महिला कॉलेज पहुंची। यहां तो छात्राएं भी एक स्कूटी पर बिना हेलमेट के तीन-तीन सवार होकर फर्राटे भरती हुईं दिखाई दी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यातायात नियमों का पालन करने में विद्यार्थी और विभाग के निर्देशों का पालन करवाने में कालेज प्रशासन कितना गंभीर है।
मुख्य गेट पर ही हो नो-एंट्री
उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा कुछ समय पूर्व सभी सरकारी व गैर सरकारी कालेजों को निर्देश जारी किया था। जिसमें बिना हेलमेट के कालेज में दुपहिया वाहन लेकर आने वाले विद्यार्थियों को कालेज के अंदर प्रवेश न करने दिया जाए। अगर नारनौल के पीजी और महिला कालेज की बात की जाए तो दोनों कालेजों में मुख्य द्वार पर एक-एक गार्ड कर्मचारी तैनात किए है। परंतु वह केवल वाहनों को व्यवस्थित तरीके से खड़ा करवाने का ही कार्य करते है। ना की विभाग के आदेशानुसार बिना हेलमेट के कालेज में दुपहिया वाहन लेकर आने वाले विद्यार्थियों को रोकते हैं।
ट्रैफिक पुलिस समय-समय चलाती है अभियान
यातायात पुलिस व सामाजिक संगठनों द्वारा समय-समय पर स्कूल व कालेजों में अभियान चलाकर विद्यार्थियों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया जाता है। यही नहीं उच्चतम न्यायालय की फटकार के बाद जिला यातायात पुलिस द्वारा महिलाओं व छात्राओं का भी चालान कर रही है। पिछले एक से डेढ़ माह के दौरान यातायात पुलिस ने 500 से अधिक महिलाओं के चालान कर चुकी है।
90 प्रतिशत छात्राएं नहीं पहनती हेलमेट
कॉलेजों की बात कर तो 90 प्रतिशत छात्राएं हेलमेट नहीं पहनती। इसके पीछे कहीं न कहीं यातायात पुलिस का छात्राओं के प्रति नर्म रवैया है। कई बार बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चलाने वाली छात्राओं को पुलिस द्वारा रोका तो जाता है, लेकिन उन्हें चेतावनी देकर ही छोड़ दिया जाता है। यही कारण है कि अधिकतर छात्राएं हेलमेट नहीं पहनती हैं।
बिना हेलमेट पहने बाइक व स्कूटी चलाने वालों के खिलाफ यातायात पुलिस लगातार अभियान चलाकर चालान कर रही है। जिसमें महिला व छात्राओं के भी चालान किए जाते हैं। यातायात नियमों को लेकर छात्रा व महिलाओं को किसी प्रकार की कोई छूट नहीं है। जो बिना हेलमेट पहने व दो से ज्यादा सवारी बैठाकर दुपहिया वाहन चलाता है, उसका चालान किया जाता है। चाहे वह महिला हो या फिर पुरुष।
-राजेंद्र कौशल, यातायात पुलिस प्रभारी नारनौल
बिना हेलमेट के दुपहिया वाहन चलाना सीधे दुर्घटना को बुलावा देना है। इसलिए दुपहिया वाहन चलाने से पहले हेलमेट पहनना चाहिए। ताकि किसी प्रकार की सड़क दुर्घटना होने पर बचा जा सके।
-छात्र विक्रम
मैं शुरू से ही स्कूटी चलाते समय हेलमेट का प्रयोग करती आ रही हूं। दुपहिया वाहन चालक के लिए हेलमेट अत्यंत जरूरी है। चाहे मुझे स्कूटी लेकर कुछ दूर ही जाना हो, लेकिन मैं हमेशा हेलमेट पहनकर चलती हूं।--छात्रा शालू
उच्चतर शिक्षा विभाग का कालेज में बिना हेलमेट के विद्यार्थियों की नो इंट्री का आदेश सराहनीय है। इससे विद्यार्थियों में जागरूकता आएगी। धीरे-धीरे दुपहिया वाहन लेकर आने वाले विद्यार्थी में हेलमेट पहनने लगेंगे। -छात्रा साक्षी