एंबुलेंस सेवा : 100 रुपये @/किमी
निजी एंबुलेंस ने 25 किलोमीटर के वसूले थे 2500 रुपये, परिजन चाहते हैं कार्रवाई
नारनौल। जिले में सरकारी एंबुलेंस सेवा की हालत खस्ता होने का फायदा निजी एंबुलेंस संचालक उठा रहे हैं। इस कारण निजी एंबुलेंस संचालक लोगों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल ही में खटोटी मोड़ के पास हादसे में मारे गए गांव डोहर कलां के तीन मासूमों के परिजनों के साथ हुआ। इनसे प्राइवेट एंबुलेंस संचालक ने 25 किलोमीटर के 2500 रुपये किराया वसूल कर लिए। अब परिजन इस मामले में कार्रवाई चाहते हैं।
जिले में सरकारी एंबुलेंस का टोटा बना हुआ है। पूरे जिले की दस लाख की आबादी पर केवल आठ ही एंबुलेंस हैं। इसके कारण आए दिन हादसों में शिकार हुए लोगों को निजी वाहनों या निजी एंबुलेंसों का सहारा लेना पड़ता है, जिनको वे मोटी रकम चुकाते हैं। कुछ ऐसा ही मामला डोहर कलां के एक व्यक्ति के साथ हुआ। डोहर कलां के तीन मासूम छात्र-छात्राओं की करीब तीन माह पहले पांच सितंबर को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इनमें से एक छात्रा गंभीर रूप से घायल थी, जिसने बाद में दम तोड़ दिया था। यहां से नागरिक अस्पताल से छात्रा को रेफर कर दिया गया था। परिजन उसे जल्दबाजी में निजी एंबुलेंस कर बहरोड़ के एक निजी अस्पताल ले गए, जो नारनौल से महज 25 किलोमीटर की दूरी पर है। बाद में उक्त एंबुलेंस संचालक ने मृतका के परिजन सुरेंद्र प्रसाद शर्मा से 2500 रुपये किराया वसूल लिया। इस पर होश संभालने पर जब इसका जिक्र सुरेंद्र कुमार ने परिजनों से किया सभी ने इस पर हैरत जताई।
सीएम विंडो में की थी शिकायत
इस बारे में पीड़ित सुरेंद्र प्रसाद शर्मा ने सीएम विंडो में शिकायत लगाई। इसमें उसने लिखा कि एक निजी एंबुलेंस संचालक ने मनमर्जी से 25 किलोमीटर दूरी के 2500 रुपये वसूल कर लिए, जो कहीं भी किराया नहीं है। इस प्रकार एंबुलेंस संचालक ने जीवन रक्षक वाहन चालक होने के बाद अपराध किया है। शर्मा ने बताया कि उनकी शिकायत आरटीए सचिव के पास गई। इसका आरटीए सचिव ने एंबुलेंस संचालक से 2500 में से 700 रुपये वापस दिलाकर शिकायत को डिस्पोज ऑफ कर दिया। वहीं एटीआर में भर दिया कि शिकायतकर्ता कोई कार्रवाई नहीं चाहता, जबकि वह इस पर ठोस कार्रवाई करना चाहता है। उन्होंने बताया कि 25 किलोमीटर के अधिकतम 1200 रुपये बनते हैं। यह बात एंबुलेंस चालक ने भी स्वीकार की थी। फिर भी आरटीए सचिव ने 700 रुपये ही वापस करवाए।
सरकारी फ्री, प्राइवेट में ले जाने पर लेते हैं चार्ज
सरकारी निर्देशों के अनुसार अगर कोई सरकारी एंबुलेंस ले जाता है तथा प्रदेश के ही किसी सरकारी अस्पताल में या पीजीआई में मरीज को इलाज के लिए ले जाता है तो उसका चार्ज नहीं लिया जाता, जबकि यदि कोई व्यक्ति मरीज को प्राइवेट अस्पताल में मरीज को ले जाता है तो उससे एंबुलेंस का चार्ज लिया जाता है। सरकारी नियमों के अनुसार सरकारी एंबुलेंस का चार्ज छोटी एंबुलेंस का सात रुपये प्रति किलोमीटर है और बड़ी एंबुलेंस का चार्ज 15 रुपये प्रति किलोमीटर के होते हैं। जिसमें आना व जाना दोनों ही शामिल होते हैं। इस प्रकार बहरोड़ आने जाने के छोटी एंबुलेंस के 350 रुपये व बड़ी एंबुलेंस के 750 रुपये ही लगेंगे।
शिकायतकर्ता और एंबुलेंस संचालक को आमने-सामने कराया गया था। इसके बाद एंबुलेंस संचालक ने शिकायतकर्ता के पैसे भी वापस किए थे। इसके बाद शिकायत डिस्पोज ऑफ की गई है।
-सुविंद्र सिंह, आरटीए सचिव, नारनौल।
सरकारी एंबुलेेंस की फ्री सेवा होती है, वहीं कुछ कंडीशन में छोटी एंबुलेंस के सात रुपये व बड़ी के 15 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से चार्ज लिए जाते हैं। प्राइवेट एंबुलेंस के कोई रेट निर्धारित नहीं हैं। वे अपनी मर्जी से चार्ज लेते हैं।
-प्रदीप कुमार फ्लिट मैनेजर, एंबुलेंस सेवा, नारनौल