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बारिश व मौसम की मार से किसान लाचार

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बिना फसल ही रह जाएगा 50 हजार हेक्टेयर तक खेत
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बारिश व मौसम की मार से किसान लाचार, इस बार हजारों एकड़ भूमि में बिजाई का टोटा
-टेल तक नहरी पानी बना किसानों की मुख्य जरूरत, गर्मी के कारण बारानी भूमि पर नहीं बोई किसानों ने फसल
फोटो नंबर 17 व 18
देवेंद्र यादव
नारनौल। इस बार अगस्त माह के बाद बारिश न होने के कारण जिले के किसान चिंतित हैं। बारिश न होने से अक्तूूबर के अंत तक मौसम में गर्माहट बनी हुई है। अधिकतम तापमान 35 डिग्री के आसपास चल रहा है। ऐसे में किसान अपनी रबी की फसल नहीं उगा पाये। सबसे ज्यादा परेशानी नलवाटी, गुर्जरवाटी और दोहान के किसानों को हो रही है। वहां पर बारानी भूमि होने के कारण इस बार किसान यहां की मुख्य सरसों की फसल की अक्टूबर के अंत तक बिजाई नहीं कर पाये हैं। हालांकि तीन-चार दिन से न्यूनतम तापमान में कमी आने के बाद सिंचाई वाले क्षेत्र के किसानों ने सरसों की फसल की बुआई कर दी है, मगर गर्म मौसम होने के कारण करीब 30 हजार से 50 हजार हेक्टेयर का बारानी क्षेत्र बधवाड़ (बिना फसल का क्षेत्र) ही रह जाएगा।
आमतौर पर सितंबर व अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में बरसात हो जाती है। इसके बाद क्षेत्र के किसान रबी की फसल की बुआई में जुट जाते हैं, मगर इस बार अगस्त के बाद क्षेत्र में बारिश नहीं हुई। बारिश न होने की वजह से तापमान में भी गिरावट दर्ज नहीं हो रही। अब किसान फसल बोने के लिए नहरों का इंतजार कर रहे हैं, मगर अटेली, नांगल चौधरी, निजामपुर व गोद बलाहा जैसे क्षेत्रों में नहरी पानी अभी नहीं पहुंचा है। ऐसे में किसानों की चिंता रबी की फसल के लिए बढ़ गई है। वहीं सरसों की बिजाई का मौसम चला भी गया है। जबकि गेहूं की बिजाई का मौसम नवंबर माह के लगते ही शुरू हो जाता है, मगर अभी अधिकतम तापमान 35 डिग्री होने के कारण किसान चिंतित दिखाई दे रहे हैं।
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रबी की है मुख्य फसल, सरसों की करते हैं बिजाई
जिले में रबी की फसल ही मुख्य फसल मानी जाती है। इसमें सरसों, गेहूं व चने की बिजाई होती है। मगर मुख्य रूप से जिला में सरसों की फसल की बुआई ज्यादा होती है। सरसों की फसल जिला में एक लाख हेक्टेयर में की जाती है। वहीं कृषि विभाग के अनुसार इसकी बिजाई का मुख्य समय एक अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक होता है। जहां तापमान ज्यादा रहता है, वहां यह फसल 25 अक्टूबर तक बोई जाती है। मगर जिला इस बार 25 अक्टूबर बीत जाने के बाद भी 50 प्रतिशत क्षेत्र में फसल पर ही बुआई नहीं हुई है। ऐसे में किसान नहरों का इंतजार कर रहे हैं।

सरसों के बाद आ जाएगा गेहूं बिजाई का मौसम
वहीं सरसों की बिजाई खत्म होते ही एक नंबर से 25 नवंबर तक गेहूं की बिजाई का मौसम भी आ जाएगा। इस कारण किसानों को ज्यादा पानी की आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में नहरी पानी पहुंचना किसानों की मुख्य मांग है।

1978 में बनी थी नहर
जोहड़ों को भरने के मकसद से सरकार द्वारा 1978 में 31 किलोमीटर लंबी नवलपुर तथा 23 किलोमीटर लंबी शहबाजपुर डिस्टीब्यूटरी का निर्माण करवाया था। दोनों माइनरों का साल्हावास जवाहर डिग से करीब 425 फुट ऊंचाई है। 13 डिग बनवाकर पानी को लिफ्ट करके अंतिम टेल तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, ताकि ग्रामीणों की पेयजल समस्या का समाधान हो सके। किंतु नहरी पानी का उपयोग पेयजल से अधिक फसल सिंचाई में बढ़ गया।

नहरी पानी होता है चोरी, टेल तक पहुंचना सपना
नहर के दोनों ओर एक हजार से अधिक अवैध इंजन दनदनाते हैं। कांवी तक पहुंचते-पहुंचते 80 क्यूसिक पानी चोरी हो जाता है। कम पानी में पंप हाउसों के गेज नहीं बनते। ऐसे में अंतिम टेल पर स्थित ग्रामीणों के लिए नहरी पानी सपना बना हुआ है। पानी सप्लाई नहीं मिलने के कारण अंतिम छोर के पंप हाउस कबाड़ हो गए। बारिश के दौरान किसानों को सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। पंप हाउसों पर पूरा पानी पहुंचता है। लेकिन लिफ्ट नहीं होने के कारण पानी आगे सप्लाई नहीं होता। जिससे ओवरफ्लो होकर डिस्ट्रीब्यूटरी कई बार टूट चुकी है।

25 से 30 हजार एकड़ रकबा प्रभावित
भूजल रिचार्ज नहीं होने के कारण मूलोदी, बिगोपुर, खातोली, नांगल पीपा, धोलेड़ा, मेघोत, सिलारपुर, भोजावास, भुंगारका, सिरोही बहाली, नांगल कालिया, मोहनपुर, नंगली, मुरारीपुर, कांवी, मामराज की ढ़ाणी व खानपुर समेत 40 गांवों की 25 से 30 हजार एकड़ से अधिक बीजाई प्रभावित होने की संभावना है।

डार्क जोन है जिला, बोरवेल पर है प्रतिबंध
सरकार द्वारा नारनौल व नांगल चौधरी ब्लॉक को डॉर्कजोन में शामिल कर दिया गया है। नियमानुसार डॉर्कजोन में बोरवेल व बिजली कनेक्शनों पर प्रतिबंध है। अब फसल सिंचाई नहरी सप्लाई पर निर्भर हो गई। लेकिन पानी नहीं मिलने के कारण फसल उत्पादन प्रभावित होने लगा है। समाधान के लिए सरकार को सिंचाई विकल्प देना चाहिए।

नहरी पानी ही विकल्प
भुंगारका के पूर्व सरपंच राजेंद्र प्रसाद, सुभाष शेहरावत, सुशील कुमार, हंसराज आदि ने बताया कि डार्कजोन में अधिकांश निजी बोरवेल सूख गए। सिंचाई व्यवस्था नहरी सप्लाई पर निर्भर है। अगर नहरी पानी नहीं मिलता है तो फसल बोना आसान नहीं है।

इतने रकबे में होती है बिजाई
सरसों 80 हजार से एक लाख हेक्टेयर
गेहूं 40 से 50 हजार हेक्टेयर
चना 15 से 20 हजार हेक्टेयर
जौ 02 हजार हेक्टेयर
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इस बार घट गया है बिजाई का रकबा
इस बार सरसों की बिजाई का रकबा घट गया है। गर्मी की वजह से सरसों की फसल नहीं उग पाती। जहां गत कई वर्षों से 80 हजार से एक लाख हेक्टेयर में सरसों की बिजाई होती थी, वहीं इस बार यह 50 हजार से 70 हजार हेक्टेयर ही बचा है।

नलवाटी, गुर्जरवाटी व दोहान में नहीं हुई बिजाई
बारानी क्षेत्र नलवाटी, गुर्जरवाटी व दोहान क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों। जिसमें निजामपुर, बायल, पाटन, पांचनौता, गोद, बलाहा, भांखरी, दोचाना, ढोसी, बदोपुर, कुलतापुर, थाना, मकसूसपुर, गहली, खटोटी, मोहनपुर, डोहर आदि क्षेत्र आते हैं, वहां आधे से ज्यादा रकबे में बिजाई नहीं हुई।

अभी तक भूंगारका पंप हाउस नंबर पांच में 20 क्यूसिक पानी पहुंच गया है। अभी चार-पांच दिन और पानी नहरों में चलने की उम्मीद है। जिससे पानी को टेल तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे। इससे छह नंबर पंप हाउस तक के किसान सिंचाई कर सकेंगे।
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-नितिन भार्गव, एसडीओ, सिंचाई विभाग

सरसों बिजाई का समय निकल गया है, इस बार बरसात कम हुई है। जिसके कारण बारानी क्षेत्र में बिजाई में प्रभाव पड़ा है। अभी सरसों की पछेती फसल के लिए तापमान कम होने पर किसान बिजाई कर सकते हैं।
-संजय यादव, एसडीओ, कृषि विभाग
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फोटो:-सूखी पड़ी नांगल चौधरी की शहबाजपुर डिस्ट्रीब्यूटरी
-बारिश के अभाव में इस तरह बधवाड़ रह गए खेत
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