लोगो बनाएं---महेंद्रगढ़ मांगे मेडिकल कॉलेज
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अब स्वास्थ्य सेवा में भी उपेक्षा का शिकार
मेडिकल कॉलेज की महेंद्रगढ़ को जरूरत है वो नांगल चौधरी के कोरियावास गांव में बनने जा रहा है
प्रदीप शर्मा
महेंद्रगढ़। पिछले 70 वर्षों से महेंद्रगढ़ राजनीति उपेक्षा का शिकार रहा है। एक बार फिर उसे राजनीतिक उपेक्षा दंश झेलना पड़ सकता है। यही कारण है कि आज जिस मेडिकल कॉलेज की महेंद्रगढ़ को जरूरत है वो नांगल चौधरी के कोरियावास गांव में बनने जा रहा है। इसके लिए मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट चंडीगढ़ के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी धनतप सिंह ने जिला उपायुक्त गरिमा मित्तल से मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए 79 एकड़ जमीन की रिपोर्ट मांगी है। यह जमीन 99 वर्ष के लिए पट्टे के लिए मांगी है। इस मेडिकल कॉलेज के लिए अटेली, नारनौल एवं नांगल चौधरी के तीनों विधायक संगठित हैं। अगर यह मेडिकल कॉलेज महेंद्रगढ़ के हाथ से निकल जाता है तो क्षेत्र को राजनीति उपेक्षा का दंश झेलना पड़ेगा।
बता दें कि पटियाला रियासत के समय का जिला महेंद्रगढ़ अपने हकों के लिए काफी समय से तरस रहा है। महेंद्रगढ़ जिला होते हुए भी उसके साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। इस पर जिले के नाम का ठप्पा तो लग गया है लेकिन मुहर नारनौल की लग गई। यही कारण हरियाणा जन्म के बाद यहां का हेड क्वार्टर नारनौल चला गया। धीरे-धीरे जो भी ऑफिस यहां थे वो सभी नारनौल चले गए। दस वर्ष पूर्व एक मात्र जेल भी नारनौल स्थानांतरित हो गई। आईएमटी की घोषणा घोषणा बनकर रह गई। सब डिपो की मांग अभी तक अधूरी है। अब मेडिकल कॉलेज भी किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र में जाने की संभावना है। इस मेडिकल कॉलेज के लिए सरकार की ओर से नांगल चौधरी के गांव कोरियावास और अटेली विधानसभा क्षेत्र के गांव मिर्जापुर बाछोद की रिपोर्ट मांगी है। जिला उपायुक्त ने कोरियावास जमीन की रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दी है जबकि मिर्जापुर बाछोद गांव की जमीन की रिपोर्ट में जिला प्रशासन लगा हुआ है। किंतु अभी तक महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र से किसी भी गांव की रिपोर्ट सरकार की ओर से नहीं मांग की गई।
इसलिए चाहिए कॉलेज
महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़ा हुआ है। इस विधानसभा क्षेत्र में कोई भी बड़ा अस्पताल नहीं है। शहर में बने उप नागरिक अस्पताल में पहले ही सुविधाओं का अभाव है। क्षेत्रवासियों ने इसे रेफरल अस्पताल की संज्ञा दी है। इस अस्पताल में प्रति माह 18 हजार की ओपीडी होती है। जबकि अस्पताल में 12 चिकित्सकों के पद हैं जिनमें से भी कुछ खाली पड़े हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन, ब्लड बैंक, एंबुलेंस, सीटी स्केन, स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी है। नारनौल में पहले ही आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज और जिले का अस्पताल है। इनमें लगभग सभी सुविधाएं हैं। प्रति माह 45 से 50 लोगों सड़क हादसे में घायल हो रहे हैं जिनमें से आधे लोग तो गुरुग्राम, दिल्ली, रोहतक और जयपुर जाते समय बीच में दम तोड़ जाते हैं।
मेडिकल कॉलेज खुलने पर दस लाख लोगों को होगा फायदा
अगर महेंद्रगढ़ नारनौल, अटेली, सतनाली, कनीना, आकोदा, सेहलंग के बीच का सेंटर है। इन स्टेशनों से महेंद्रगढ़ की अधिकतम दूरी 25 किलोमीटर की पड़ती है। इसके अलावा महेंद्रगढ़ की सीमा से लगते राजस्थान जिले के झुंझून के कई गांव के ग्रामीण भी इलाज के लिए महेंद्रगढ़ आते हैं। यदि महेंद्रगढ़ में मेडिकल कॉलेज खुल जाता है तो इससे महेंद्रगढ़, अटेली, नारनौल विधानसभा क्षेत्र और राजस्थान गांवों समेत लगभग दस लाख लोगों को फायदा होगा। सबसे अधिक फायदा सतनाली को होगा, क्योंकि सतनाली का आखिरी गांव श्यामपुरा और कुम्हारों की ढाणी लगभग 40 किलोमीटर दूर पड़ती है। अगर नांगल चौधरी के गांव में खुलता है तो नांगल चौधरी इन गांवों से 90 किलोमीटर दूर पड़ता है।
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सरकार की ओर से कोरियावास और मिर्जापुर बाछोद में मेेडिकल कॉलेज के लिए जमीन की रिपोर्ट मांगी गई थी। कोरियावास की रिपोर्ट बनाकर भेज दी गई है, जबकि मिर्जापुर बाछोद की रिपोर्ट बनाई जा रही है।
-जिला उपायुक्त , गरिमा मित्तल।