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अटेली नपा प्रधान व उप प्रधान का चुनावी छठी बार टला

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अमर उजाला ब्यूरो
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मंडी अटेली। अटेली नगर पालिका के प्रधान व उपप्रधान की ताजपोशी छठी बार भी नहीं हो पाई। नपा की बैठक में शनिवार को कोई भी पार्षद नहीं पहुंचा। चुनाव अधिकारी एसडीएम जगदीश प्रसाद ने डेढ़ बजे तक पार्षदों के आने का इंतजार किया। इसके बाद बैठक की कार्रवाई समाप्त करने की औपचारिक रुप से घोषणा कर दी।
चुनाव अधिकारी एसडीएम जगदीश शर्मा 11 बजे ही नगरपालिका परिसर में पहुंच गये। करीब डेढ़ बजे तक पार्षदों का इंतजार कर बैठक स्थगित की घोषणा कर दी। इस बार भी पहले की तरह विधायक के समर्थन में पांच और विपक्ष में छह पार्षद अपने-अपने पाले में अडिग रहे। जितिन अग्रवाल गुट के पक्ष में छह पार्षद, जबकि डिप्टी स्पीकर संतोष यादव के पक्ष के पांच पार्षद एक जगह पर बैठे रहे। बताया जा रहा है कि जितिन अग्रवाल के समर्थन में छह पार्षद नगर पालिका के नजदीक एक मकान में बैठक स्थगित होने की घोषणा तक बैठे रहे। वहीं, छटी बार बैठक होने के बाद भी डिप्टी स्पीकर अपने समर्थक को चेयरमैन नहीं बना पाई। विपक्ष के पार्षद एकजुट नजर आए।
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सत्ता पक्ष के एक पार्षद पर अटकी चेयरमैन की कुर्सी
चेयरमैन की कुर्सी की लड़ाई लड़ रहे जितिन के पक्ष में पार्षद विकास यादव, पार्षद अशोक जांगिड़, पार्षद स्नेहलता, पार्षद सरोज शर्मा व पार्षद प्रमीला शामिल रही, जो नगरपालिका के नजदीक एक घर में चुनावी बैठक स्थगित नहीं हुई तब तक बैठे रहे। जिस पार्षद को अपने पक्ष में आने की उम्मीद डिप्टी स्पीकर के समर्थकों को थी, वह नहीं आया।

तभी लोगों ने बैठक स्थगित होने का अनुमान लगा लिया। सत्ता पक्ष के पार्षद का बहुमत न होने के कारण चेयरमैन का चुनाव अटका हुआ है। सूत्र बताते है कि 11 पार्षदों में बहुमत नहीं बन पाया है। पहले अटेली की पूर्व सीपीएस अनीता यादव सत्ता में थी तो समर्थक संजय गोयल की पत्नी सुमन गोयल को चेयरपर्सन बनाया। सत्ता में आने पर अटेली की भाजपा विधायक व डिप्टी स्पीकर ने अपने समर्थक विकास यादव को चेयरमैन बनाया। लेकिन अब दोबारा से भाजपा बहुमत साबित नहीं कर पा रही। पार्षद संजय गोयल व जतिन निर्विरोध चुने गए थे। दोनों ही पार्षद चेयरमैन की दौड़ में है। लेकिन जतिन का परिवार पिछली तीन पीढ़ियों से इनेलो के कट्टर समर्थक हैं।

भाजपा असमंजस की स्थित में
नपा के चुनाव में भाजपा असमंजस की स्थिति में फंस गई है। वैसे तो लड़ाई भाजपा बनाम इनेलो के बीच दिख रही है। लेकिन, हाल में सीएम का कुछ विधायकों ने विरोध किया था। ऐसे में बीजेपी का एक सांसद अंदर खाने पूरे मामले को बिगाड़ने या दूसरे गुट को काबिज होने की तैयारी में है। जिससे की सीएम गुट को शिकस्त दी जा सके। ऐसे में एक प्रकार से बीजेपी सत्ता में होने के बावजूद भी चेयरमैनी की ताजपोशी नहीं करा पाई। चुनाव डिप्टी स्पीकर की प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है। पहले एक पार्षद विधायक के पक्ष में जो अब अनबन के कारण पाला बदल दिया है। इससे बीजेपी बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पा रही है। बार-बार चुनाव टलने से बीजेपी की किरकिरी हो रही है। इससे क्षेत्र का विकास कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
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ये हुईं बैठक
-13 मई : नगर पालिका पार्षदों का चुनाव 13 मई को हुए थे।
-14 जून : चेयरमैन की नियुक्ति व शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन हुआ लेकिन कोई पार्षद नहीं पहुंचा।
-22 जून : नारनौल में शपथ ग्रहण समारोह हुआ।
-23 जुलाई : बैठक में छह पार्षद उपस्थित हुए। कोरम पूरा न होने के कारण कार्रवाई टली।
-15 सितंबर : एक बार फिर तिथि तय की गई, जिसमें चुनाव अधिकारी उपस्थित रहे लेकिन पार्षद नदारद रहे। - 3 अक्तूबर : चौथी बार एक बार फिर बैठक हुई। चुनाव अधिकारी तो पहुंचे लेकिन पार्षदों की अनुपस्थिति रही। - 12 दिसंबर : पांचवीं बार छह पार्षद पहुंचे लेकिन कोरम पूरा न होने के कारण चुनाव फिर टला।
- 12 जनवरी : छठी बार भी एक भी पार्षद नहीं पहुंचा, ताजपोशी नहीं हुई।
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