अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। रोडवेज के कर्मचारी मंगलवार को चक्का जाम करने उतरेंगे। पिछली हड़ताल में निलंबित किए 247 और चार्जशीट किए 1780 कर्मचारी दो दिन की हड़ताल में हिस्सा लेंगे। सरकार की ओर से 24 मांगे माने जाने के दावे पर कर्मचारी नेताओं ने कहा कि हमारी 24 मांगे मत मानो केवल प्राइवेट बस पॉलिसी वाली मांग को ही पूरा करो।
रोडवेज के कर्मचारी एस्मा के बीच ही दोबारा से हड़ताल करने उतरेंगे। सरकार ने 5 सितंबर की हड़ताल से पहले छह महीने के लिए एस्मा लगाया था। फिलहाल प्रदेश में एस्मा जारी है। रोडवेज की पिछले महीने की हड़ताल में 238 कर्मचारियों को निलंबित किया था, जिनको अभी तक बहाल नहीं किया गया है। इसके बाद रोडवेज के नौ कर्मचारियों को सस्पेंड किया था। सरकार ने 1780 कर्मचारियों को चार्जशीट किया था। इन पर भी अभी तक कोई फैसला नहीं हो सका है। सरकार ने सितंबर की हड़ताल के समय हुए करीब ढाई करोड़ रुपये के राजस्व घाटे को भी कर्मचारियों के वेतन से काटकर पूरा करने के लिए कहा था। इस पर भी फैसला नहीं हो सका है।
रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष दलबीर किरमारा ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की 24 मांग माने जाने का दावा कर रही है। हम अपनी इन सभी मांगों को छोड़ने को तैयार हैं। सरकार इन सभी मांगों को रद्द कर दे। सिर्फ निजी बसों की पॉलिसी को रद्द करने की मांग पूरी कर दे। अगर सरकार रोडवेज के बेड़े में बसों की संख्या बढ़ाने के लिए कर्मचारियों से सहयोग मांगेगी तो सभी कर्मचारी एक-एक महीने का वेतन भी देने को तैयार हैं।
चार साल में बढ़ने की बजाए घटा बेड़ा
कर्मचारी नेताओं ने दावा करते हुए कहा कि पिछली सरकार के समय रोडवेज का बेड़ा 4500 बसों तक पहुंच गया था। अब बेड़े में करीब 4100 बसें ही शामिल हैं। जितनी बसें कंडम हो रही हैं उतनी संख्या में बसें शामिल नहीं हो रही है। सरकार ने बसों की संख्या को विस्तार नहीं दिया।