अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। राजकीय प्राथमिक पाठशाला नया बास में शिक्षा विभाग की 105 साइकिलें धूल फांक रही हैं। दो वर्ष पहले विभाग द्वारा साइकिलें मंगवाई गई थीं। उस समय विभाग ने जरूरत से अधिक साइकिलें खरीद ली थी। बच्चों को साइकिल वितरित करने के बाद जो साइकिलें बच गई थी, वे तभी से साइकिलें महेंद्रगढ़ के नया बास प्राथमिक पाठशाला के पुराने भवन में रखी हुई हैं। विभाग द्वारा सरकार के पास साइकिलें वापस भी नहीं भेजी गई हैं। कमरे में रखी साइकिलों के टायर-ट्यूब खराब हो गए हैं। इससे सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उक्त साइकिलों की उच्च अधिकारियों ने दो बार रिपोर्ट मांगी थी। दोनों बार उन्होंने अपनी रिपोर्ट भेज दी है। वैसे भी सरकार ने पिछले दो वर्षों से साइकिल वितरण करने का सिस्टम चेंज कर दिया गया है। नए सिस्टम के अनुुसार विद्यार्थी साइकिलें स्वयं खरीद रहे हैं।
ये है योजना
बता दें कि शिक्षा विभाग की ओर छठी, नौंवी और 11वीं कक्षा के अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों को नि:शुल्क साइकिलें वितरित की जाती हैं। छठी कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का घर दो किलोमीटर, 9वीं और 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का घर स्कूल से पांच किलोमीटर दूर होने पर साइकिल दी जाती है।
वर्ष 2015-16 में खंड कार्यालय महेंद्रगढ़ में 208 साइकिलें कक्षा 9वीं और 11वीं के विद्यार्थियों के लिए आई थीं। इनमें से 176 साइकिलों को वितरित कर दिया गया था। उस वर्ष 32 साइकिलें शिक्षा विभाग के पास शेष रह गई थीं। 2016-17 में 489 साइकिलें आई थीं। इनमें से 416 साइकिलें वितरित की गई थीं, जिनमें से 73 साइकिलें शेष रह गई थीं। दोनों वर्षों की 105 साइकिलें शिक्षा विभाग के पास पड़ी हुई हैं।
सरकार को लग रहा लाखों रुपये का चुना
साइकिल व्यापारी ने बताया कि एटलस कंपनी ने साइकिल बनानी बंद कर दी हैं। दो वर्ष पहले 20 और 22 इंची एक साइकिल लगभग 3800 रुपये की आती थीं। अगर उन कीमतों का ध्यान में रखकर गणना की जाए तो सरकार को करीब चार लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। जिस कमरे में साइकिल रखी हैं, उसकी विंडो खुली होने के कारण बारिश का पानी अंदर जाता है, जिससे उनके टायर और रीम खराब हो रहे हैं। इससे सरकार को लाखों रुपये का चुना लग रहा है। इस प्रकार प्रदेश के अन्य खंडों में भी साइकिलें बची होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
सरकार ने साइकिल वितरण का सिस्टम किया चेंज
प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति एवं जन जाति के विद्यार्थियों को वितरित किए जाने वाली साइकिल योजना को बदल दिया है। बदली गई योजना अनुसार विद्यार्थी अपने पैसों से साइकिल खरीद कर उसका बिल शिक्षा विभाग के पास जमा करवा दें। उसके खाते में उतनी ही राशि सरकार डाल देती है। यह योजना पारदर्शी अवश्य है परंतु आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों के लिए ठीक नहीं लग रही। बहुत से ऐसे परिवार हैँ जो धन के अभाव में बच्चों को साइकिल नहीं दिला पा रहे। पिछले दो वर्षों में साइकिलों की संख्या में भी कमी आई है। पिछले वर्ष छटी कक्षा के 6 विद्यार्थियों ने, नौंवी और 11वीं कक्षा के लगभग 66 विद्यार्थियों ने साइकिलें ली थीं।
वर्जन
साइकिलें ज्यादा आने की वजह से वितरित नहीं की गई। उच्च अधिकारियों द्वारा इसकी दो बार रिपोर्ट मांगी जा चुकी हैं दोनों बार हम रिपोर्ट बनाकर भेज चुके हैं। दो वर्षों से सरकार ने साइकिल वितरण का सिस्टम चेंज कर दिया है। इसलिए शेष रखी साइकिलें वितरित नहीं की गई।
- बिजेंद्र सिंह श्योराण, खंड शिक्षा अधिकारी।