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09 लाख की लागत से लगाई गई सोलर ट्रैफिक लाइटें

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-चरमराई शहर की ट्रैफिक व्यवस्था, लोग परेशान
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टो नंबर 15 से 19
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। शहर के महावीर चौक पर 09 लाख रुपये की लागत से गत वर्ष लगाई गईं ट्रैफिक लाइटें इस समय अवधि में लगातार एक माह भी ठीक ढंग से नहीं चल पाईं। ट्रैफिक लाइटें एक वर्ष में करीब आठ-दस बार खराब हो चुकी हैं। वर्तमान में भी ट्रैफिक लाइटें पिछले डेढ़ दो माह से खराब पड़ी हैं। लाइटें खराब होने के कारण शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी चरमराई हुई है। इस कारण ट्रैफिक पुलिस के जवानों को पूरा दिन धूप और धूल में खड़ा रहकर ट्रैफिक कंट्रोल करना पड़ रहा हैं। वहीं ट्रैफिक लाइटों के बार-बार खराब होने व संबंधित ठेकेदार की ओर से सही समय पर व सही प्रकार ठीक नहीं करने पर नगर परिषद उक्त ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट कर उसकी धरोहर राशि जब्त ली है।
शहर में बढ़ते वाहनों की संख्या व दबाव के चलते प्रशासन ने शहर के सबसे व्यस्ततम महावीर चौक व हीरो होंडा चौक पर बिजली से संचालित ट्रैफिक लाइटें लगवाई थीं। परंतु आपूर्ति बार-बार बाधित होने के कारण ट्रैफिक लाइटें भी काम करना छोड़ देतीं, वहीं बिजली फाल्ट आदि होने के कारण ये लाइटें कई बार खराब हो जाती थीं। इससे यातायात अव्यवस्थित हो जाता था। ऐसे में शहर के महावीर चौक पर लगी ट्रैफिक लाइटों के खराब होने और बार-बार उनको बदलने की समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर परिषद ने यहां पर वर्ष 2016 में सोलर संचालित ट्रैफिक लाइटें लगवाई थीं। इन लाइटों को लगाने में नगर परिषद के 09 लाख रुपये खर्च हुए थे। जिला मुख्यालय नारनौल शहर में इस समय दो जगहों, महावीर चौक और होंडा चौक पर ट्रैफिक लाइटें लगी हुई हैं। होंडा चौक पर बिजली से संचालित ट्रैफिक लाइटें लगाई गई हैं, लेकिन वहां पर कंट्रोलर न होने के कारण लगने के कुछ समय बाद ही खराब हो गई। जिसकी ओर नप ने ध्यान नहीं दिया। इस कारण ये लाइटें वर्ष भर से बंद ही पड़ी हैं।
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लाइटें खराब होने से चरमराई ट्रैफिक व्यवस्था
महावीर चौक शहर का मुख्य चौक होने के कारण यहां पर ट्रैफिक का बहुत अधिक दबाव रहता है, लेकिन ट्रैफिक लाइटों से यातायात सुचारु चलता है, वहीं दुर्घटना होने की संभावना भी नहीं रहती है। परंतु ट्रैफिक लाइटें लगने के बाद ये लगातार एक माह कभी सुचारु रूप से नहीं चली। इसके कारण ट्रैफिक व्यवस्था चरमराने लगी है, वहीं लाइटें ठीक न होने के कारण वाहन चालक बेतरतीब ढंग से अपने वाहनों को निकाल रहे थे। इससे लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


ये लाइटें लगने के बाद हर एक-दो माह में खराब हो जाती हैं। इससे लोगों को परेशानी होती है। इससे यातायात अव्यवस्थित होने के कारण वाहन यहां-वहां अनियंत्रित होकर चलते हैं। इससे हादसे का डर बना रहता है।
-मनोज सैनी

ट्रैफिक लाइटें एक वर्ष पूर्व ही लगाई गई थीं, लेकिन इस समय अवधि में ये लाइटें कई बार खराब होने चुकी हैं। अब भी डेढ़-दो माह से लाइटें खराब हैं। लाइट ठीक न होने से वाहन चालक नियमों की भी परवाह नहीं कर रहे हैं।
-राकेश कुमार

शहर में एक जगह ही ट्रैफिक लाइटें लगी हुई हैं। ये भी अक्सर खराब ही रहती हैं। इससे यातायात भी अव्यवस्थित हो जाता है। वहीं यहां आने-जाने में बहुत परेशानी होती है। इसके साथ ही हादसों का भी भय बना रहता है।
-गंगाराम सैनी

जबसे ये सोलर लाइटें लगी हैं, तबसे ये खराब ही रहती हैं। इसके कारण शहर के इस मुख्य चौराहे पर वाहन निकालते समय डर भी लगने लगा है। बिना ट्रैफिक लाइट के अक्सर चालक अपने वाहन को जल्दी निकालने के लिए तेज दौड़ाते हैं।
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-मान सिंह

ट्रैफिक लाइटों के बार-बार खराब होने और ठेकेदार की ओर से ठीक ढंग से रिपेयर नहीं करने पर उसे ब्लैक लिस्ट कर उसकी धरोहर राशि जब्त कर ली गई है। किसी अन्य से ट्रैफिक लाइटों को ठीक करवाने संबंधित मांग हाउस की बैठक में रखी गई है।
-भारती सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, नारनौल।
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