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आंगनवाड़ी सेंटरों के छह साल तक के बीस फीसदी बच्चे बीमारी ग्रसित

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अमर उजाला ब्यूरो
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महेंद्रगढ़। बदलती लाइफ स्टाइल व खानपान का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने जून में आंगनबाड़ी केंद्रों के 5329 बच्चों की हेल्थ जांच की थी। इसमें से करीब दो हजार बच्चे बीमार पाए गए। मसलन करीब बीस फीसदी बच्चे किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हैं। जिसमें सबसे अधिक 1738 बच्चे एनीमिया से ग्रसित हैं। इसके अलावा दिल में छेद के 17 बच्चे भी मिले हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम(आरबीएसके)के तहत सरकारी, सहायता प्राप्त स्कूलों के अलावा आंगनबाड़ी सेंटरों के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसके लिए विभाग की नौ टीमें स्कूलों में जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती है। जिससे की बीमारियों का पता लगाकर दूर किया जा सके। आरबीएसके के तहत जून में आंगनबाड़ी सेंटर के 2823 लड़के व 2506 लड़कियों की हेल्थ जांच की गई। जिसमें से 877 बच्चों में सांस, 414 दांत, 1738 खून की कमी के अलावा अन्य प्रकार की बीमारियां मिली थी। स्वास्थ्य विभाग में आरबीएसके के प्रभारी डॉ. विकास यादव ने बताया कि 9 टीमें इस कार्य में लगी हुई है। एक टीम में डॉक्टर समेत चार मेंबर होते हैं। टीमें सेंटरों पर जाकर बच्चों की जांच करती है। जरूरतमंद बच्चों को जिला स्तर पर डीआईसी सेंटर पर भेजा जाता है। जहां डॉक्टर उनका उपचार करते हैं। जिले में 1153 आंगनबाड़ी सेंटर है।
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17 बच्चे के दिल में जन्मजात छेद
जून की रिपोर्ट में 30 बच्चों में जन्मजात बीमारी मिली। इनमें 14 लड़के व 16 लड़कियां शामिल है। बच्चों में क्लेफ्ट लिप के 4, क्लेफ्ट फुट के तीन के अलावा सबसे अधिक दिल में छेद के 17 बच्चे पाए गए। डॉक्टर विकास के अनुसार ऐसे बच्चों को उपचार के लिए गुरुग्राम के आर्टेमिस व नारायण अस्पताल भेजा जाता है। जन्मजात दिल में छेद होने का प्रमुख कारण गर्भवती महिला की लाइफ स्टाइल जिम्मेदार है। जैसे समय पर खाना न लेना, एल्कोहल के प्रयोग व इस दौरान बुखार व ब्लड शुगर के बढ़ने व जेनेटिक कारणों से भी हो सकता है।
1738 बच्चों में मिली खून की कमी-
छह सप्ताह से 6 साल के बच्चों में खून की कमी पाई गई है। 1738 बच्चे एनीमिया के मिले। इसमें (852 लड़कियां व 886 लड़के) शामिल है। सबसे बड़ी बात यह है कि छह सप्ताह से तीन साल के तक के बच्चों में भी एनीमिक मिले हैं। इस वर्ग में 871 बच्चों में खून की कमी मिली। इसमें 454 लड़के व 417 लड़कियां शामिल है। तीन से छह साल आयु वर्ग के बच्चों में भी ऐसे ही हालात है। 485 लड़के व 492 लड़कियों में खून की कमी मिली। 109 बच्चों का पूरा ग्रोथ नहीं हो पा रहा है। कमोवेश इस मामले में लड़के व लड़कियों की हालत एक जैसे ही है। चौंकाने वाली बात यह है कि महेंद्रगढ़ जिले में भी बच्चें स्वस्थ नहीं है। डॉ. डीएस धनखड़ ने बताया कि इसके पीछे दो कारण है। पहला खानपान व दूसरा बच्चे के पेट में कीड़े होना। कीड़े के लिए बच्चों को दवा दी जाती है। खानपान पर परिवार को ध्यान देने की जरुरत है। कार्यक्रम के प्रभारी विकास यादव ने कहा कि ऐसे बच्चों को आयरन की गोली के अलावा कीड़े मारने की दवा दी जाती है। इसके साथ ही पूरा ग्रोथ न होने वाले बच्चों को रेडीटूयूज फ्रूट दिया जाता है। जिससे उनका पूरा शारीरिक ग्रोथ हो सके।
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अन्य प्रकार की बीमारियां
स्कीन संबंधी 806, डेंटल 416, सांस संबंधी 877 (लड़के 446 व लड़कियां 431)। सांस में सबसे अधिक प्रभावित छह वीक से तीन साल के बच्चे है। उनकी संख्या 506 (246 लड़के व 260 लड़कियां) है। डॉक्टरों का कहना है कि यहां पर सांस संबंधी बीमारी जन्म के समय होना सामान्य बात है। कई बार ऐसा बच्चों को हो जाता है।
बाक्स-
कुल पंजीकृत बच्चे-41,777
जून में जांच हुआ-5,329
विभिन्न प्रकार के बीमारी से पीड़ित मिले-1925
जिले में कुल आंगनबाड़ी सेंटर-1153
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