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पिछले साल का वर्दी भता मिला नहीं, दूसरे साल का आधार लिंक योजना में उलझा, पत्राचार कर पल्ला झाड़ रहे

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पिछले साल का वर्दी भत्ता मिला नहीं, दूसरे साल में उलझा
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-अकाउंट से आधार कार्ड नहीं हुए लिंक, एक-दूसरे को दोषी ठहरा रहे बैंक व स्कूल कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। वर्दी भत्ता मुहैया कराने के लिए सरकार ने बजट तो सेंक्शन कर दिया, लेकिन आधार कार्ड लिंक नहीं होने के कारण अकाउंट में नहीं पहुंचा। दो साल से अधिकारी पत्राचार करके औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। इससे विभाग की ऑनलाइन योजना नकारा होने लगी है।
बता दें कि प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को 400 रुपये वर्दी भत्ता, 120 रुपये बैग और 100 रुपये स्टेशनरी के लिए मिलते हैं। महंगाई बढ़ने के कारण निर्धारित बजट से वर्दी, जूते, जुराब खरीदना संभव नहीं। शिकायत मिलने पर विभाग ने बजट राशि बढ़ाकर 800 रुपये निर्धारित कर दी। बच्चों को तत्परतापूर्वक आर्थिक सहायता मिल सके, इसलिए आनलाइन योजना क्रियान्वित कर दी गई। पिछले साल दाखिला प्रक्रिया भी ऑनलाइन हो चुकी है। अब विद्यार्थियों का दो स्कूलों (निजी या सरकारी) में पंजीकरण नहीं हो सकेगा। अप्रैल महीने में वर्दी का बजट सीधा बच्चों के अकाउंट में डालने का निर्णय लिया गया। उच्च स्तरीय निर्णय के मुताबिक स्कूल प्रबंधन कमेटी (एसएमसी) की ओर से निर्धारित कलर की वर्दी अभिभावक स्वयं खरीदेंगे। इससे पारदर्शिता के साथ अभिभावकों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
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निदेशालय की ओर से डीईओ की मार्फत स्कूल इंचार्जों को विद्यार्थियों के बैंक अकाउंट व आधार नंबर एमआईएस पोर्टल पर डालने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अधिकांश शिक्षकों ने विभाग के निर्देशों को गंभीरता पूर्वक नहीं लिया। इस कारण लगभग 60-70 प्रतिशत बच्चों का रिकार्ड आनलाइन हो सका। जिनका रिकार्ड निर्धारित पोर्टल पर अपडेट हो चुका, उन्हें बजट उपलब्ध करवा दिया गया। अन्य विद्यार्थियों का वर्दी भत्ता रोक लिया। इसके संदर्भ में ब्लॉक स्तर पर पत्र पहुंच चुका। बीइओ ने स्कूल इंचार्जों को पत्र भेजकर औपचारिकता पूरी कर दी। परिणामस्वरूप 31 मार्च 2017 तक साढ़े चार हजार बच्चे भत्ते से वंचित रह गए। नये शैक्षणिक सत्र में करीब 32 हजार बच्चों के दाखिले हो चुके। जिन्हें अप्रैल महीने में वर्दी व स्टेशनरी भत्ता मिलना चाहिए था। किंतु मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन स्कूल (एमआईएस) पोर्टल पर आधार कार्ड नंबर अपलोड नहीं हुए। जिस कारण विद्यार्थियों की आर्थिक सुविधा अटकी हुई है।
सुविधा देने में सक्षम कई अभिभावक
नांगल चौधरी खंड में 103 प्राथमिक पाठशाला हैं। सूत्रों की मानें तो 95 से अधिक स्कूलों में सरकारी कर्मियों के बच्चे नहीं पढ़ते। 60 फीसदी बच्चों के अभिभावक मजदूरी करते हैं। जोकि आर्थिक तंगी के चलते बच्चों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने में सक्षम नहीं।
बैंकों में जमा करवा दिए आधार नंबर
नांगल चौधरी प्राथमिक स्कूल के इंचार्ज नरेश यादव ने बताया कि बैंक में सभी बच्चों के आधार नंबरों की सूची जमा करवा दी। बावजूद वर्दी भत्ते के आवेदन रद्द कर दिए गए। अकाउंट खुलवाते समय भी आधार कार्ड बतौर आइडी दी गई थी। बावजूद बैंक प्रशासन खातों को लिंक नहीं कर रहा।
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अकाउंट लिंक नहीं होने से कुछ बच्चों का बजट अटका
विभाग के एपीसी प्रेमचंद ने बताया कि वर्दी भत्ते का बजट रिलीज हो चुका। आधार कार्ड से अकाउंट लिंक और पोर्टल पर अपडेट नहीं होने के कारण कुछ बच्चों को नहीं मिला। इस संदर्भ में उच्चाधिकारी अवगत हैं और समाधान करने की प्रक्रिया जारी है। जल्द ही अकाउंटों में पैसे जमा होने की उम्मीद है।
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