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रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन दोपहर तक यात्रियों को हुई परेशानी-

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल/महेंद्रगढ़।
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल से दूसरे दिन भी दोपहर तक यात्रियों को असुविधा उठानी पड़ी। सुबह यात्रियों को राहत देने के लिए बिना कंडक्टर के 31 बसें विभिन्न रूटों चलाई गई। इन बसों में यात्रियों से किराया नहीं लिया गया। हालांकि इसके बाद भी यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। कर्मचारियों के असहयोग को देखते हुए रोडवेज प्रबंधन ने दूसरे जिलों से करीब 40 कर्मचारियों का नारनौल डिपो के लिए बुलाया। दूसरी ओर परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों के आश्वासन के बाद नारनौल रोडवेज कर्मचारियों ने दोपहर बाद हड़ताल समाप्त कर दी। दोपहर ढाई के बाद नियमित रूप से रोडवेज बसे सड़कों पर दौड़ना शुरू हो गई। जिससे विभाग के अधिकारियों को बड़ी राहत मिली।
प्रदेश में बुधवार की शाम लगभग सभी डिपो में हड़ताल समाप्त कर दी गई थी, लेकिन नारनौल पुलिस प्रशासन द्वारा एस्मा लगने के बाद भी कर्मचारियों ने बसों को रोकने का प्रयास करने पर 54 कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। वहीं, 28 कर्मचारियों को अरेस्ट कर लिया गया था। इसमें से 6 को जेल भेज दिया था। जिसके विरोध में रोडवेज यूनियन के नेताओं ने आर-पार की लड़ने की बात कही। जिसका असर यह हुआ कि वीरवार को सुबह 11 बजे नारनौल व महेंद्रगढ़ डिपो में दिखने को मिला। दोनों डिपो में दोपहर तक पूरी तरह से बस सेवा शुरू नहीं हो सकी। हालांकि नारनौल डिपो के जीएम ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच सुबह के वक्त 31 बसें चलाई। इन बसों पर कंडक्टर नहीं मिल पाए। ऐसे में रोडवेज ने लोकल रूट पर यात्रियों को फ्री में सेवा दी। दूसरी ओर रोडवेज ने रेवाड़ी डिपो की 10 बसों को नारनौल-रेवाड़ी रूट पर चलाकर यात्रियों की परेशानी का कुछ हद तक कम करने का प्रयास किया लेकिन नाकाफी रहा। दूसरी ओर रोडवेज जीएम बलवंत सिंह ने यूनियन नेताओं से बात कर हड़ताल समाप्त करने की अपील की थी। यूनियन नेताओं ने जीएम से जेल भेजे गए 6 कर्मचारियों को बाहर निकलवाने तथा अन्य कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करवाने की बात कही। जीएम रोडवेज ने उच्चाधिकारियों से बात कर उनके मांगे मानने का आश्वासन दिया। जिसके बाद कर्मचारी ने दोपहर बाद हड़ताल का समाप्त कर दी और सभी अपने काम पर लौट गए। जीएम ने कहा कि लोगों की सहूलियतों को देखते हुए 31 बसों को बिना कंडक्टर के चलाने का फैसला लिया गया था। दोपहर बाद कर्मचारी काम पर लौट आए। इससे लोगों को राहत महसूस हुई।
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40 कर्मचारी दूसरे जिले से बुलाए गए
जिले में रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए दूसरे डिपों से 20 चालक और 20 परिचालकों को नारनौल बुलाया गया। सभी को नारनौल डिपो में शाम को ज्वांइन करवा दिया गया है। हालांकि चालक परिचालक को ड्यूटी पर नहीं लगाई गई है। शुक्रवार सुबह तक सभी कर्मचारी नारनौल में रहेंगे। नारनौल के कर्मचारियों ने फिर कोई आना कानी की तो उनके स्थान पर बाहर से आए कर्मचारियों को ड्यूटी लगाई जाएगी।
लाखों का नुकसान
रोडवेज यूनियन नेताओं के अनुसार नारनौल डिपो की एक दिन की कमाई 13 लाख रुपये है। ऐसे में दो दिन रोडवेज को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि सरकार के रवैये के कारण कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं।
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वर्जन
रेवाड़ी, भिवानी, चरखी और भिवानी डिपो से पांच-पांच ड्राइवर और कंडेक्टर बुलाए है। सभी ड्राइवर और कंडेक्टरों को नारनौल डिपो में शुक्रवार को सुबह नौ बजे तक रखा जाएगा। स्थित सामान्य रही तो उन्हें वापस भेज दिया जाएगा। वीरवार को सुबह 31 बसें चलाई गई। दोपहर बाद बस सेवा पूरी तरह से बहाल हो गई।
- बलवंत गोदारा जीएम, नारनौल डिपो।
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