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क्षि के क्षेत्र में धीरे-धीरे होने लगी है जिला की तरक्की

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विकास पकड़ने लगा रफ्तार आहिस्ता आहिस्ता
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शिक्षा क्षेत्र में हब बना, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में पिछड़ा, जिला, देश का प्रति वर्ष देता है सैकड़ों इंजीनियर और डॉक्टर्स
फोटो नंबर 18 व 19
अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़/नारनौल। आजादी के एक साल बाद 1948 में अस्तित्व में आया महेंद्रगढ़ जिला धीरे-धीरे तरक्की करने लगा है। जिले का गठन 1948 में पटियाला रियासत की नारनौल और महेंद्रगढ़, जींद रियासत की दादरी तहसील और नाथ रियासत की बावल निजामत का कुछ हिस्सा मिलाकर जिला महेंद्रगढ़ का गठन किया गया था। गठन के समय से ही नारनौल को जिले का मुख्यालय बनाया गया था। अपने अस्तित्व में आने के 60 साल तक जिला में किसी भी क्षेत्र में खास तरक्की नहीं हो पाई थी। पर, अब जिला धीरे-धीरे तरक्की करने लगा है। कभी यहां शिक्षा के गिने चुने स्कूल कॉलेज होते थे, मगर अब यहां शिक्षा के मंदिरों की भरमार है। यही कारण है जिला महेंद्रगढ़ को पूरे प्रदेश में शिक्षा के हब माना जाने लगा है। इसके अलावा जिले में बिजली, सड़कें, यातायात की सुविधा बन पाई है जबकि रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन स्थल, फैक्ट्रियां आदि के नाम पर जिले का बुरा हाल है। उद्योग नहीं होने के कारण यहां के बेरोजगार युवकों को अन्य राज्यों में कमाने के लिए जाना पड़ता है। इस जिले की सबसे बड़ी उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में रही है। शिक्षा के क्षेत्र में महेंद्रगढ़ शिक्षा का हब बना है। इस जिले से प्रति वर्ष सैकड़ों की संख्या में चिकित्सक, इंजीनियर एवं लेफ्टिनेंट बनते हैं। यहां के इंजीनियर विदेशों में जाकर महेंद्रगढ़ जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
एक समय में अधिकारी जिले में अपनी पोस्टिंग से कतराते थे और इसे उत्तरी हरियाणा में काले पानी के नाम से जाना जाता था। वर्ष 2010 तक इस जिले में कोई खास तरक्की नहीं देखी गई, मगर 2010 के बाद धीरे-धीरे यहां तरक्की होने लगी है। यही कारण है कि अब जिला में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय बन गया है, वहीं जल्द ही आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज की भी शुरुआत हो जाएगी। इसके अलावा यहां अब इंजीनियरिंग कालेज, बहुतकनीकी संस्थान व अन्य स्कूल कालेजों की भी भरमार हैं। इसके अलावा जिले अपने में अनेक ऐतिहासिक धरोहरों को समाये हुए है। नारनौल शहर में आज भी अनेक मुगलकालीन वास्तुकला की बेहतरीन बानगी को पेश करते स्मारक प्राचीन गौरवगाथा के गवाह हैं।
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पहले उच्च शिक्षा के लिए जाते थे बाहर
यहां के बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पहले बाहर जाते थे। हालांकि अभी भी अच्छे कालेज या संस्थान जिला में नहीं हैं, मगर बाहर उच्च शिक्षा ग्रहण करने जाने वालों की संख्या अब कम हो गई है। उल्टा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि से यहां जेबीटी व बीएड करने हर वर्ष हजारों युवा आते हैं। वहीं केंद्रीय विश्वविद्यालय में पूरे देश से बच्चे यहां पर दाखिले के लिए आते हैं।

1966 में थे गिनेचुने स्कूल
1966 की बात की जाए तो यहां एकमात्र पीजी कॉलेज था, वहीं जिले में तीन सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एक हाई स्कूल था। तीन सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में एक नारनौल, एक महेंद्रगढ़ और एक नांगल चौधरी में स्कूल था। जबकि अटेली में एक हाईस्कूल ही था।

सरकारी स्कूल
प्राइमरी सीसे हाईस्कूल मिडिल
472 94 36 100

जिले में कई कॉलेज
जिले में इस समय अनेक कॉलेज खुल गए हैं, जबकि जिले में कुल 12 कॉलेज सरकारी हैं। इसमें दो कालेज नारनौल, द ो कालेज महेंद्रगढ़, दो कालेज अटेली, दो कालेज नांगल चौधरी, एक-एक कालेज कृष्ण नगर, कनीना व सतनाली स्थित है। जबकि एजूकेशन कालेज नारनौल स्थित है। वहीं एक सरकारी पालीटेक्निक कालेज व आठ सरकारी आईटीआई जिले में स्थित है। इनके अलावा नारनौल के पटीकरा में आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज तथा महेंद्रगढ़ के पाली में केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थित है।

फोटो संख्या:37, 38 और 39

महेंद्रगढ़ बना शिक्षा का हब
प्रदेश में महेंद्रगढ़ जिला शिक्षा का हब बन गया है। जिले के हब बनने के पीछे किसी सरकारी संस्थान का हाथ नहीं है बल्कि निजी संस्थाओं की वजह से यह जिला शिक्षा के क्षेत्र में हिंदुस्तान में अग्रणी बना है। क्षेत्र के विद्यार्थी बोर्ड कक्षाओं, आईआईटी, पीएमटी आदि परीक्षाओं में प्रदेश में नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान में टॉप रैंक प्राप्त करते हैं। 2014 के आईएएस बैच में हिंदुस्तान में महेंद्रगढ़ जिला एक ऐसा था जिसने 8 आईएएस एक साथ दिए। इनमें एक आईएएस ने 6वीं रैंक प्राप्त की थी। यहां एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है। इसके अलावा कोई बड़ा सरकारी शिक्षण संस्थान नहीं है। यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली, जयपुर जैसे बड़े नगरों में जाना पड़ रहा है। जिले में एक दर्जन महाविद्यालय तो खोले हुए हैं किंतु उनमें स्टाफ की कमी है। इसके अलावा आधुनिक सुविधा भी कॉलेज में नहीं दी गई।

नहीं मिला जिले को पानी का हक
बंसीलाल सरकार ने इस जिले में नहरों का तो जाल बिछा दिया किंतु नहरी पानी के लिए आज भी तरस रहा है। जिले राजनेताओं की कमी की वजह से रावी व्यास का पानी नहीं मिल पाया। एसवाईएल पानी के मुद्दे पर सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। सरकार की कमियों के कारण नांगल चौधरी के हालात यह हो गए, पानी का स्तर 1000 फीट से नीचे जाने के कारण डार्क जोन घोषित करना पड़ा। जिले में कई ऐसे गांव हैं जहां पर पानी टैंकरों से भिजवाए जा रहे हैं।

नहीं बना महेंद्रगढ़ औद्योगिक नगरी
क्षेत्र के वयोवृद्ध और समाजसेवी शिव कुमार गौड ने बताया कि महेंद्रगढ़ में दोहान नदी बहती थी। उस दौरान नदी की मिट्टी में कांच के बारीक कण होते थे। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद जापान के इंजीनियर की टीम यहां पहुंची थी और इस मिट्टी की जांच करवाई। जांच करवाने के बाद उन्होंने यहां कांच बनाने की फैक्ट्री लगाने की मांग की थी किंतु नेताओं ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। इस कारण वह फैक्ट्री लगाना रद्द हो गया। इसके अलावा खुडाना गांव की पहाड़ियों में भी लोहे होने की बात थी किंतु वह भी रद्द हो गया। अगर उक्त फैक्ट्रियां लग जाती तो शायद महेंद्रगढ़ आज औद्योगिक नगरी बन जाता। फैक्ट्री के साथ लोगों को रोजगार के अवसर भी प्रदान होते।

स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़ा
महेंद्रगढ़ जिला आज भी स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़ा हुआ है। यहां नारनौल में एक मात्र आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज है जिसका अभी उद्घाटन नहीं हुआ है। सरकारी अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही है। जिले में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी है। इसलिए यहां के मरीजों को रोहतक, जयपुर, गुरुगाम इलाज के लिए जाते हैं जहां पर उन्हें भारी भरकम राशि खर्च करनी पड़ती है।

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हरियाणा अलग होने के बाद महेंद्रगढ़ विकास उतना नहीं हो पाया जितना होना चाहिए था। क्षेत्र में सरकारी कोई उपलब्धि नही हैं। जिले में न तो मेडिकल कॉलेज है और न ही फैक्ट्री। जो महेंद्रगढ़ के बाद के जिले हैं आज वो महेंद्रगढ़ से बहुत आगे निकल चुके हैं। इसके पीछे राजनीतिक कमजोरियां रही हैं।
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-शिव गौड, हस्तरेखा शास्त्री
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हरियाणा जन्म के बाद महेंद्रगढ़ का विस्तार तो हुआ है। विश्वविद्यालय और फ्लाईओवर बने हैं। किंतु रोजगार की दृष्टि से आज भी महेंद्रगढ़ पीछे है। अगर फैक्ट्रियां लग जाती तो यहां के बेरोजगारों का कमाने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं में भी महेंद्रगढ़ पिछड़ा हुआ है।
-मदन लाल सोलूवाला।
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