बच्चों को डायरिया से खतरा, विभाग अलर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। बारिश होते ही मच्छर और कीटाणु पनपने लगते हैं। इनसे संक्रामक बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। छोटे बच्चों को डायरिया होने की आशंका रहती है। इसकी रोकथाम के लिए विभाग ने ओआरएस पैकेट वितरण की योजना बनाई है। विभाग की ओर जिले के प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों को सप्लाई पहुंचा दी गई। यह ओआरएस पैकेट आंगनबाड़ी, आशा वर्कर और एएनएम को स्वयं की मौजूदगी में बच्चे को पिलाना होगा।
स्वास्थ्य को लेकर सरकार गंभीर है। मरीजों की सुविधा को लेकर सरकार ने करीब 50 योजनाएं क्रियान्वित कर दी गई। इसके तहत घर-घर सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। सीजन के अनुसार हर महीने ओरल, मलेरिया, डेंगू, आयोडीन जांच पखवाड़ा मनाया जाता है। विभाग ने एमपीएचडब्लू, आशा वर्कर, एएनएम को गांव स्तर पर ओरआरएस पैकेट वितरण के निर्देश हैं। तर्क दिया गया कि छोटे बच्चों को गंदगी की जानकारी नहीं होती। दूषित वस्तुओं को मुंह में लेने या हाथों में लेकर खेलने की आदत होती है। इनसे जहरीले कीटाणु शरीर में प्रवेश कर जाते है। उन्हें उल्टी-दस्त शुरू हो जाते है। तत्परता पूर्वक उपचार नहीं मिलने पर पानी और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसे में ओरआरएस के घोल में सप्लीमेंट्री पोषक तत्वों का मिश्रण होता है। इसके पीने से तुरंत राहत मिलती है।
हाथ धोकर खाना खाएं : डॉ. मनीष
सीएचसी के इंचार्ज डॉ. मनीष यादव ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मचारी छह साल तक के बच्चों को ओआरएस पिलाने में जुटे हैं। बारिश के दौरान कीटाणु पनपने शुरू हो जाते हैं। इसलिए घरों में खाद्य वस्तुओं को ढककर रखना चाहिए। डायरिया पीड़ित को राहत मिलने के बाद भी 5-7 दिन उपचार लेना चाहिए।
बुखार होने पर करवाएं रक्त जांच
सीएचसी इंचार्ज ने बताया कि जलभराव में मच्छर अधिक पैदा होते हैं। घरों के आसपास नालियों की नियमित सफाई होनी चाहिए, ताकि जहरीले मच्छरों को बढ़ावा नहीं मिले। बुखार होने पर रक्त जांच करवाना अनिवार्य है। इससे चिकित्सक को इलाज करने में सुविधा रहेगी।