मरीजों को ले जाने वाली एंबुलेंस खुद बीमार, 25 में से 12 कंडम
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। जिले में लंबे समय से चली आ रही नेशनल हेल्थ मिशन के तहत कार्यरत आपातकालीन सेवाओं (एंबुलेंस) की हालत खस्ता है। वर्तमान में पूरे जिले की दस लाख की आबादी, दो बड़े शहरों, चार कस्बों व 346 गांवों के लिए मात्र 8 एंबुलेंस अपनी सेवाएं दे रही हैं। इन एंबुलेंसों की भी स्थिति भी अच्छी नहीं है। पूरे जिले में सिर्फ एंबुलेंस वर्किंग में होने के कारण सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर न मिलने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। वहीं डिलीवरी केसों को भी घंटों एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ता है। करीब छह माह पूर्व नांगल चौधरी में हुए हादसे के बाद भी एंबुलेंस सेवा की कमी खली थी। जिसके चलते घायलों को प्राइवेट वाहन में ले जाना पड़ा था। जिले को मिली कुल 25 एंबुलेंसों में से अब केवल आठ ही मरीजों को लाने-ले जाने के लिए बची हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आपातकालीन सेवाओं के लिए जिले को 25 एंबुलेंस प्रदान की गई हैं। इनमें से 12 एंबुलेंस कंडम घोषित की जा चुकी हैं। इसके अलावा दो एंबुलेंस का रखरखाव का खर्चा ज्यादा होने के कारण उन्हें भी मरम्मत के लिए अनफिट कर दिया गया है। 1 एंबुलेंस को रिपेयर के लिए भेजा गया है। दो एंबुलेंस कार्यक्रमों के लिए ट्रांसफर की गई हैं। ऐसे में जिले में केवल 8 एंबुलेंस अॅान रोड हैं। ये एंबुलेंस भी चलते-चलते कब सड़क के बीच बंद हो जाएं, कहा नहीं जा सकता है।
वर्तमान में 27 एंबुलेंस की जरूरत
नेशनल हेल्थ मिशन की गाइड लाइन के अनुसार जिला अस्पताल नारनौल के लिए अकेले नारनौल में 10 एंबुलेंस की जरूरत है, लेकिन दो ही उपलब्ध हैं। इसके अलावा महेंद्रगढ़ को भी 7 एंबुलेंस की जरूरत है। इसके अलावा अटेली, कनीना, सतनाली, नांगल चौधरी व निजामपुर में भी कम से कम 2-2 एंबुलेंस का होना जरूरी है। इस प्रकार जिले में एनएचएम की गाइड लाइन के मुताबिक 27 एंबुलेंस होनी आवश्यक है।
डिलीवरी केसों में मुश्किल से मिलती है एंबुलेंस
जिला मुख्यालय नारनौल तीन ओर से राजस्थान से घिरा हुआ है। ऐसे में जिले के अलावा राजस्थान के सीमावर्ती गांवों के लोग भी उपचार के लिए जिला अस्पताल आते हैं। ऐसे में जिला अस्पताल में रोजाना 20 से 25 डिलीवरी केस आते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं के 8 से 10 केस आ रहे हैं। इस प्रकार अकेले जिला अस्पताल में 30 से 35 आपातकालीन केस आ रहे हैं। ऐसे में अकेले जिला मुख्यालय पर करीब 15 एंबुलेंसों की जरूरत है, लेकिन यहां तो पूरे जिले में ही केवल 8 एंबुलेंस कार्यरत हैं। डिलीवरी के बाद छुट्टी मिलने पर सुबह पर्ची जमा करवाने पर शाम को उनका नंबर आता है। इसी प्रकार शाम को पर्ची जमा करवाने वाले केसों की बारी अगले दिन ही आती है।
दुर्घटना के समय पर नहीं मिलती एंबुलेंस
एंबुलेंस की कमी का असर सड़क दुर्घटनाओं के केसों पर भी पड़ रहा है। सड़क दुर्घटना होने पर अक्सर जिला अस्पताल स्थित एंबुलेंस कार्यालय में फोन आता है, लेकिन यहां एंबुलेंस उपलब्ध न होने की स्थिति में दूसरे स्टेशनों पर संपर्क किया जाता है। दूसरे स्टेशन पर एंबुलेंस उपलब्ध होने पर उसे मौके पर भेजा जाता है। इस प्रकार एंबुलेंस को मौके पर पहुंचने में करीब 1 घंटे से अधिक समय लग जाता है। इस प्रकार 1 घंटे से अधिक समय तक घायल को सड़क पर पड़े रहना पड़ता है। इससे कई बार अत्यधिक रक्तस्त्राव से उसकी मौत भी हो जाती है। ऐसे में यदि सड़क दुर्घटना में घायल मरीज को समय पर एंबुलेंस मिल जाए तो उसकी जान बच सकती है। नांगल चौधरी में भी करीब छह माह पहले हादसे के बाद घायलों को ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली थी।
यह है पूरी स्थिति
जिला में कुल एंबुलेंस-25
कंडम घोषित-12
अब आन रोड-08
एक्सीडेंट-03
अंडर मेंटेंस-एक
कंडम की प्रक्रिया में-02
जिले में एंबुलेंस की कमी है। इसके लिए उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराया हुआ है। जल्द ही जिले में पांच नई एंबुलेंस मिलने की उम्मीद है। इससे सेवाओं में कुछ सुधार अवश्य होगा।
-इंद्रजीत धनखड़, सिविल सर्जन, नारनौल।