अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। श्रम कानूनों में परिवर्तन और बैंकों के विलय करने के खिलाफ बैंक कर्मचारी मंगलवार को हड़ताल पर रहे। इसके चलते क्षेत्र के सभी राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहे। क्षेत्र की राष्ट्रीयकृत बैंकों के 250 से ज्यादा बैंक कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल रहे। इस कारण लगभग 50 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित रहा और उपभोक्ताओं को भी परेशानी हुई। उपभोक्ता बैंक में पहुंचे तो उन्हें हड़ताल की जानकारी हुई। इसके बाद वे निराश लौट गए। हालांकि, निजी बैंक हड़ताल में शामिल नहीं हुए और उनमें सामान्य रूप से काम हुआ। मंगलवार को एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि बैंक शाखाएं बंद रहीं। बैंक कर्मचारियों की मांग है कि सरकार बैंकिंग सुधारों को वापस ले। बैंकों में पर्याप्त भर्ती शुरू करे।
बैंक कर्मचारियों का कहना है कि सरकार सुधारों के नाम पर भारतीय बैंकिंग क्षेत्र का निजीकरण और एकीकरण करना चाहती है। सरकार बैंक बोर्ड ब्यूरो (बीबीबी) का गठन करके सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों को एक बैंकिंग निवेश कंपनी के तहत लाने का काम करने जा रही है। इसका कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा सरकार बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 49 फीसदी से कम करने जा रही है। बैंक डूबे कर्ज की वसूली का प्रयास करने के बजाय उसे बेड डेट खाते में डाल रहे हैं।
कैश निकलवाने के लिए आया था लेकिन, हड़ताल के कारण बैंक बंद मिले। हमें हड़ताल के बारे में पता नहीं था। पैसे की बहुत आवश्यकता थी। अब एटीएम पर देखेंगे।
-धर्मवीर
बैंक में लेनदेन के विषय में जानकारी लेने के लिए आया था। अब कल दोबार आना पड़ेगा। हड़ताल की जानकारी नहीं थी। इससे समय की बर्बाद भी हुई।
-नरेश शास्त्री
कैश जमा करवाने के लिए आया था। बैंक बंद होने के कारण लौटना पड़ रहा है। अब कल दोबार आना पड़ेगा। पहले पता होता तो समय बच जाता।
-राकेश सैनी
पैर में चोट लगी है। जैसे तैसे बैंक में पहुंची थी। बैंक में कैश निकलवाने के लिए आई थी। यहां आई तो बैंक बंद मिला। इससे मुझे बहुत परेशानी हुई है।
-राधारानी