महेंद्रगढ़। दो महीने पहले इंडियन नेशनल लोकदल को ज्वाइन करने वाले बलवान फौजी को भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा से प्रत्याशी बनाया है। पूर्व सैनिक रहे बलवान का यह पहला चुनाव होगा। बलवान ने करीब दस साल की सेवा के बाद फौज छोड़ दी थी। उन्होंने सेना छोड़ने के बाद सिक्योरिटी एजेंसी शुरू की। बलवान सिंह 12वीं पास है।
इनेलो ने बेहद साधारण कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाया है। बलवान फौजी सामाजिक मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। मारुति का महेंद्रगढ़ में लाने और अहीर रेजीमेंट के मुद्दे को लेकर उन्होंने सामाजिक अभियान चलाए थे। उनके अभियान देखकर अभय सिंह चौटाला ने कहा था कि इन मुद्दों को राजनीति के जरिए ही हल किया जा सकता है। फरवरी 2019 में बलवान फौजी ने औपचारिक तौर पर इनेलो ज्वाइन की थी।
बलवान ने बताया कि 1999 में सेना ज्वाइन की थी। लांस नायक के पद पर रहते हुए उन्होंने 31 मार्च 2010 को सेना छोड़कर अपना बिजनेस करने का फैसला लिया। गुरुग्राम में सिक्योरिटी कंपनी शुरू की। जिसकी देश के कई राज्यों में शाखाएं हैं। 38 वर्षीय बलवान ने बताया कि इससे पहले उन्हें चुनाव लड़ने का कोई अनुभव नहीं है। उनके परिवार में कोई राजनीति में नहीं है। बलवान फौजी ने कहा कि वह टारगेट लेकर काम करते हैं। इस लोकसभा चुनाव को टारगेट के तौर पर लेकर मैदान में उतरेंगे।
क्यों मिली टिकट
बलवान को यादव होने के चलते टिकट दी गई है। बलवान पूर्व फौजी भी है। अहीरवाल बेल्ट में भिवानी-महेंद्रगढ़ जिले में सबसे अधिक संख्या में पूर्व सैनिक हैं। सैनिक बाहुल्य इस क्षेत्र में यादव और पूर्व सैनिक फैक्टर को देखते हुए बलवान फौजी को टिकट दी गई है।
फौज के सिपाही की तरह इनेलो का सिपाही
बलवान ने कहा कि उसे उम्मीद नहीं थी कि सीधे लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। कुछ दिन पहले अभय सिंह चौटाला ने फोन करके पूछा था कि आपको टिकट दी जाए तो चुनाव लड़ सकोगे। इसके जवाब में मैंने कहा था कि पूर्व फौजी हूं, किसी काम में पीछे नहीं हटूंगा।