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किसी ने 20 तो किसी ने 30 साल से किया हुआ था कब्जा

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किसी ने 20 तो किसी ने 30 साल से किया हुआ था कब्जा
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देवेंद्र यादव
नारनौल। शहर में वीरवार को चलाए गए महाअतिक्रमण हटाओ अभियान में प्रशासन ने 20 से 30 वर्ष पुरानी दुकानों को जमींदोज कर दिया। प्रशासन ने करीब ऐसी 200 दुकानों को बिल्कुल तोड़ दिया, जिन्होंने वर्षों से कब्जा जमाया हुआ था। वहीं इस कार्रवाई में करीब 100 दुकानें ऐसी भी टूट गई जो लीगल बताई जा रही हैं। मगर कार्रवाई के दौरान उनके प्रशासन ने न तो कागज देखे न ही कोर्ट के कोई आदेश। जिससे व्यापारियों में रोष भी है। वहीं इस अभियान से पूर्व लिखित रूप में प्रशासन ने किसी भी दुकानदार को नोटिस भी नहीं दिया।
शहर में वीरवार को चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान अपने आप में बहुत बड़ा अभियान रहा। इस अभियान में प्रशासन ने महावीर चौक पर बनी करीब 10 पक्की दुकानों को तोड़ा। इनमें ये सभी दुकानें ऐसी थी, जो करीब 30 साल से बनी हुई थी। मुख्य चौक पर बनी एक मिठाई की दुकान का बरामदा तो करीब 40 साल पुराना बताया जा रहा है। वहीं यहां पर कई लिगल दुकानें भी अतिक्रमण की भेंट में चढ़ गई। इनके अलावा पुलिस लाइन के मुख्य गेट पर बने वर्षों पुराने शहर व आसपास में अपने अलग स्वाद के लिए जाने जाने वाले छिप्पी ढाबे व उसके साथ लगते 10 खोखो को भी प्रशासन ने हटा दिया। लोहा मंडी में करीब 50 पक्की दुकानों को तोड़ा गया। जिन्होंने करीब दस साल से पक्का कब्जा कर दुकानों को दस फुट तक बढ़ाया हुआ था। ये सभी अवैध कब्जे की दुकानें थी। नई मंडी रोड पर भी इतनी ही पक्की अवैध दुकानों को हटाया गया। प्रशासन ने अस्पताल के सामने भी करीब 50 दुकानों को हटाया। जिन्होंने टीन शेड व अन्य सामान से कब्जा किया हुआ था। वहीं अस्पताल रोड पर किलारोड की ओर जाते समय भी पक्की दुकानों व कब्जों को हटाया।
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-एंबुलेंस को नहीं मिलता था रास्ता, हो गई थी एक युवक की मौत
अतिक्रमण हटाने से पूर्व डीसी ने कई बार व्यापारियों को चेतावनी भी दी थी। उपायुक्त के पास शिकायत थी कि यहां लोहा मंडी में दुकानदारों द्वारा कब्जा होने के कारण एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिलता। जिससे एक युवक की मौत भी हो चुकी है। लोहा मंडी में शुरू किया गया यह अभियान बाद में शहर के अनेक हिस्सों में चला दिया गया।
-दुकानदार दुकान बंद कर भागे, शाम को ही बंद हो गई शहर की दुकानें
अतिक्रमण हटाओ अभियान का समाचार मिलते ही दुकानदार अपनी दुकानों को बंद कर भाग गए। जिसके कारण शहर के अधिकांश बाजार शाम छह बजे ही बंद हो गए।
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