स्कूली बच्चों को आयरन की दवा देने के बाद अब बच्चों को कीड़े मारने की दवा भी दी जाएगी। इस दवा को राष्ट्रीय स्तर पर दिया जाएगा। इसके तहत 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन एक से 19 साल तक के बच्चों को दवा दी जाएगी। स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग इसकी तैयारियों में जुटे हैं।
स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली आयरन की दवा के बाद अब स्वास्थ्य विभाग बच्चों को कृमि (कीड़े मारने की दवा) पिलाएगा। इसके लिए 10 फरवरी का दिन निर्धारित किया गया है। इस दिन सभी सरकारी, गैर सरकारी स्कूलों के अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों में भी यह दवा पिलाई जाएगी। इसके तहत एक साल से 19 साल तक के बच्चों को यह दवा दी जाएगी। इस दिन को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का नाम दिया गया है। इस दिन यदि कोई बच्चा किसी कारण से दवाई लेने से छूट जाता है तो उसको 16 फरवरी को यह दवा दी जाएगी। इसके तहत एक से पांच साल तक के बच्चों को दवा चबाकर खानी होगी, जबकि छह से 19 साल तक का बच्चा कैसे भी इस दवा का सेवन कर सकता है।
क्या है कृमि नाशक दवा
कृमि एक परजीवी होते हैं, जो जीवित रहने के लिए मनुष्य की आंत में रहते हैं। कृमि मानव शरीर के जरूरी पोषक तत्व को खाते हैं, जिससे मनुष्य में खून की कमी, कुपोषण व वृद्धि में रुकावट होती है। ये तीन प्रकार के होते हैं राउंड कृमि, व्हिप कृमि और हुक कृमि।
लक्षण
हल्के संक्रमण वाले बच्चों को आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, पर उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। तीव्र संक्रमण से कई लक्षण होते हैं, जैसे कमजोरी, भूख न लगना, खून की कमी तथा कुपोषण आदि।
फायदे
खून की कमी में सुधार
बेहतर पोषण स्तर
रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने में मदद
सीखने की क्षमता में सुधार
कहां-कहां दी जाएगी दवा
इस दिन स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से सभी नामांकित, पंजीकृत, गैर पंजीकृत और स्कूल न जाने वाले बच्चों को एल्बेंडाजाल की दवा दी जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी ने ली बैठक
इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी ने बृहस्पतिवार को डीइओ कार्यालय में बैठक ली। जिसमें डीईओ संतोष तंवर ने शिक्षा विभाग की ओर से की गई तैयारियों के बारे में बताया। वहीं इस बारे में स्कूल मुखियाओं को भी संदेश देने के लिए बीईओ को कहा। इस मौके पर शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के अनेक अधिकारी मौजूद थे।