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जिले की सड़कों को लावारिस गोवंश मुक्त बनाने का लक्ष्य पौने दो साल भी अधर में

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वेद प्रकाश शर्मा
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महेंद्रगढ़। गोवंश को सड़कों से हटाने के लिए गोसेवा आयोग महेंद्रगढ़ जिले में करीब 2.49 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। इसका बड़ा हिस्सा गोशालाओं को दिया गया है। दो वर्ष से शहर में प्रशासन ने लावारिस गोवंश पकड़ने का अभियान तक नहीं चलाया है। अकेले महेंद्रगढ़ शहर में करीब 500 लावारिस गोवंश सड़कों पर उन्मुक्त होकर घूम रहे हैं। दो वर्षों में लावारिस गोवंश से महेंद्रगढ़ में दो की जबकि जिले में पांच लोगों की जान जा चुकी है। इसी तरह 15 लोग घायल हो चुके हैं। गो सेवा आयोग का कहना है कि राजस्थान की सीमा से गोवंश को हरियाणा में भेज दिया जाता है।
जुलाई 2017 में सीएम के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राकेश गुप्ता ने दो बार वीडियो कांफ्रेंसिंग से राज्य के सभी उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों में लावारिस पशुओं को पकड़ कर गोशालाओं में छोड़ने के आदेश दिए थे। इसके बाद डीसी ने शहर की गोशालाओं के प्रतिनिधियों, नगर परिषद, नगर पालिका अधिकारियों की बैठक बुलाकर गोवंश को गोशालाओं में रखने के निर्देश दिए थे। नगर पालिका ने लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए ठेका दिया था। एक लावारिस गोवंश पकड़कर गोशाला में छोड़ने पर 450 रुपये की राशी निर्धारित की गई थी। 31 जुलाई 2017 तक जिले को लावारिस गोवंश मुक्त करना था। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार जिले में 4300 लावारिस गोवंश थे।
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प्रशासन ने दावा किया था कि चार हजार लावारिस गोवंशों को गोशालाओं में भेज दिया है। गोशाला भेजे लावारिस गोवंशों की टैगिंग भी की गई थी। महेंद्रगढ़ में करीब 250 लावारिस गोवंश पकड़े थे। कुछ समय के लिए सड़कों पर लावारिस पशुओं की संख्या कम हो गई थी। एक साल से सड़कों पर लावारिस गोवंश लगातार बढ़ता जा रहा है।
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अध्यक्ष बोले राजस्थान से आ रहा गोवंश...
सड़कों पर गोवंश बढ़ने पर गोसेवा आयोग ने दावा किया है कि राजस्थान से गोवंश महेंद्रगढ़ में आ रहा है। आयोग के अध्यक्ष भानीराम मंगला ने मोबाइल पर अमर उजाला से बातचीत में कहा कि हमने 90 से 95 प्रतिशत गोवंश को गोशालाओं में भेज दिया था। राजस्थान की सीमा से लगा होने के कारण राजस्थान के लोग गोवंश को हरियाणा की सीमा में भेज देते हैं।
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सड़कों पर गाय नहीं नंदी का प्रकोप...
पूरे जिले की बात करें तो दो साल में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें अकेले महेंद्रगढ़ में दो लोगों की मौत हुई है। नारनौल में दो, कनीना में एक, अटेली और सतनाली में एक एक की मौत हुई है। जिले में अब तक 15 लोग गोवंश के कारण घायल हो चुके हैं। जिला प्रशासन ने अधिकतर गायों को गोशालाओं में भेज दिया लेकिन सांड़ों को लेकर कोई रणनीति नहीं बनाई। नंदी अब भी सड़कों पर ही लावारिस घूम रहे हैं। दरअसल गोशाला संचालक नंदी को नहीं रखते। इस कारण नंदी अब भी जनता के लिए मुसीबत बने हैं।
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सोमवार से लावारिस गोवंश को पकड़ने का अभियान शुरू करवा दिया जाएगा। महेंद्रगढ़ नगर पालिका में सचिव नहीं है। एमई को बोल दूंगी कि वे ठेकेदार के माध्यम से लावारिस गोवंशों को पकड़वाने का काम शुरू करे। - डॉ. गरिमा मित्तल, उपायुक्त, महेंद्रगढ़।
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