अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। स्वाइन फ्लू से ग्रस्त ढाई वर्ष के बच्चे को इलाज नहीं मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अब अलर्ट जारी किया है। सामान्य दिनों की तरह से छुट्टी के दिन भी नागरिक और सभी उप नागरिक अस्पतालों में ओपीडी होगी। पंपलेट्स, फ्लैक्स बोर्ड आदि के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अस्पतालों में अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया जाएगा।
कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि स्वाइन फ्लू घातक बीमारी नहीं है। समय पर उपचार कराकर आसानी से ठीक किया जा सकता है। खांसी -जुकाम होने पर अस्पताल में जांच जरूर करवाएं। बुखार होने पर भी सावधानियां बरतें। सीएमओ ने बताया कि मंगलवार से रूटीन में महेंद्रगढ़ उप- नागरिक अस्पताल को चेक किया है। एसएमओ को स्वाइन फ्लू के लिए अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाने के निर्देश दिए। खांसी- जुकाम की ओपीडी छुट्टी के दिन भी होगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में टैमी फ्लू स्टॉक में रखें। मरीज को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आने दी जाए। स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीज के परिजनों संपर्क में रहें।
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कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले रहें सतर्क
डॉ. अशोक कुमार के कहा स्वाइन फ्लू वायरस से बचने के लिए क्रॉनिक बीमारियों से ग्रस्त, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले, सर्दी-जुकाम से पीड़ित, बच्चे और बुजुर्गों को विशेषतौर से सावधानी बरतने की जरूरत है। सार्वजनिक स्थलों पर छींकते-खांसते समय मुंह पर कपड़ा जरूर रखें। सार्वजनिक स्थान पर थूकने से बचें। बस, मेट्रो या पब्लिक परिवहन सेवा का उपयोग करने वाले लोग हाथों में सेनेटाइजर लगा सकते हैं। घर आने के बाद सबसे पहले मेडिकेटेड साबुन या लिक्विड से हाथ साफ करें, चेहरा भी धोएं।
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क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू , इनफ्लुएंजा (फ्लू वायरस) के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। इस वायरस को ही एच1 एन1 कहा जाता है। इसके संक्रमण ने वर्ष 2009-10 में महामारी का रूप धारण कर लिया था। इस साल भी प्रदेश में कई लोगों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है और काफी ग्रस्त हैं।
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स्वाइन फ्लू के लक्षण
नाक का लगातार बहना, छींक आना
कफ, कोल्ड और लगातार खांसी
मांसपेशियों में दर्द या जकड़न
सिर में तेज दर्द
नींद न आना, ज्यादा थकान
दवा खाने पर भी बुखार बढ़ना
गले में खराश का बढ़ना
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ऐसे करें बचाव
लक्षण दिखने पर आराम करें। खूब पानी पीएं। शुरुआत में पैरासीटामॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बाद में एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाएं स्वाइन फ्लू के इलाज में कारगर मानी गई हैं।
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सीएमओ ने नवीन के घर भेजी टीम
सीएमओ डॉ. अशोक कुुमार ने स्वाइन फ्लू से ग्रस्त ढाई वर्षीय नवीन कौशिक के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए टीम घर भेजी। परिजनों के मुताबिक, नवीन अब आईसीयू में नहीं है। हालत खतरे से बाहर है। उनके पिता भी बीमार बताए जा रहे थे। परिजनों ने स्वाइन फ्लू की जांच करवाने से मना कर दिया था। लेकिन विभाग की टीम मरीज के घर पर जाकर जांच करके आएगी।