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नेस की रिपोर्ट पर होगी टीचर ट्रेनिंग,महेंद्रगढ़ के लिए अलग बनेगा ट्रेनिंग मॉड्यूल

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) टीचर ट्रेनिंग में व्यापक बदलाव करने जा रही है। शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए एससीईआरटी ने अब राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (नेस) के आधार पर टीचर ट्रेनिंग कराने की योजना बनाई है। इससे अच्छा प्रदर्शन न करने वाले बच्चों के टीचरों को जरूरत के अनुसार ट्रेनिंग दी जा सके।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) नई दिल्ली सरकारी स्कूलों के बच्चों का पिछले साल राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण कराया था। इसमें कक्षा तीन,पांच व आठवीं के बच्चों को शामिल किया गया था। नेस की जारी रिपोर्ट में हरियाणा में शिक्षा में कई जगहों पर कमी देखी गई है। दूसरी ओर नेस की रिपोर्ट व शिक्षा विभाग की मासिक मूल्यांकन की रिपोर्ट में भी काफी अंतर पाया गया। जिसके बाद शिक्षा निदेशालय ने नेस की रिपोर्ट का अध्ययान करने के लिए एससीईआरटी से कहा था। एससीईआरटी की टीम ने नेस की रिपोर्ट को जिलेवार अध्ययन किया। जिसमें पाया गया कि हर जिले के बच्चों का लर्निंग आउटकम अलग-अलग है। कहीं बच्चे मैथ में सही तो कहीं साइंस में। इसके बाद एससीईआरटी ने टीचर ट्रेनिंग मॉड्यूल को बदलने का फैसला लिया है।
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एससीईआरटी में समग्र के प्रभारी मनोज कौशिक ने बताया कि अब ट्रेनिंग टीचर में बदलाव किया गया है। हर जिले की अलग-अलग कमजोरियां है और कहां पर ट्रेनिंग की जरुरत है। हर जिले के लिए अलग-अलग मॉड्यूल बनाया जा रहा है। विषयवार और कक्षावार भी ध्यान दिया जाएगा। इसे लेकर डायट के टीचरों के साथ दो दिन तक वर्कशॉप आयोजित किया था। जिसमें अलग अलग टीचर ट्रेनिंग मॉड्यूल बनाने पर विचार विमर्श किया। प्राइमरी स्तर पर टीचर ट्रेनिंग काम काम तनू भारद्वाज देखेगी जबकि अपर प्राइमरी के मनोज कौशिक को जिम्मेदारी दी गई है। विशेषज्ञ ललित कुमार ने बताया कि रिपोर्ट पर सभी जिलों के डीईईओ व डायट प्रिंसिपलों के साथ बैठक हो चुकी है। जल्द ही डीईओ व डीपीसी के साथ भी शेयर किया जाएगा।
ऐसे समझे नेस की अहमियत
नेस एक प्रकार से थर्ड पार्टी असेसमेंट है। पिछले साल नवंबर में सर्वेक्षण हुआ था और फरवरी में रिपोर्ट जारी हुई थी। इसमें हर विषय से कुछ लर्निंग आउटकम तय किया गया था। जिसके बच्चों के शैक्षिक स्तर की सही जानकारी मिल सके।
क्या है लर्निंग आउटकम
शिक्षा विभाग ने बच्चे के शैक्षिक स्तर जानने के लिए एक तय मानक बना रखा है। जैसे कक्षा तीन के बच्चें को चार अंको तक का जोड़ आना चाहिए। जब नेस या मैट की परीक्षा होगी तो उसी आधार पर ही प्रश्न पूछे जाएगे। यदि बच्चे इसे हल नहीं कर पाया तो उसका लर्निंग आउटकम से पीछे हैं।
महेंद्रगढ़ के बच्चों का प्रदर्शन
कक्षा तीन ईवीएस में 54 स्कूलों के 645 बच्चे शामिल थे। 40 फीसदी बच्चों ने 50 से 75 फीसदी अंक पाया। 16.90 फीसदी छात्रों ने 30 से 50 फीसदी तक नंबर पाया था। हिन्दी में 15 फीसदी बच्चों ने 30 से 50 फीसदी तक नंबर पाया था। 29.29 फीसदी बच्चों ने 50 से 75 फीसदी अंक पाया। गणित में 19.22 बच्चों ने 30 से 50 फीसदी अंक पाया था। 39 फीसदी ने 50 से 75 फीसदी अंक पाया था। 5वीं गणित में 26 फीसदी ने 30 से 50 तक जबकि 38.58 फीसदी बच्चों ने 50 से 75 फीसदी अंक पाया था। डेली यूज के नंबर लिखने में प्रदर्शन खराब था। 5वीं में 55 स्कूल के 819 बच्चे शामिल थे। आठवीं के गणित में 38 फीसदी बच्चें 30 से 50 फीसदी अंक पाया था। 20.30 फीसदी बच्चों ने 50 से 75 फीसदी अंक पाया। आठवीं में गणित में 44 स्कूलों के 921 बच्चे शामिल थे।

नेस रिपोर्ट के अनुसार टीचरों की ट्रेनिंग होगी। इसके लिए विषय विशेषज्ञ मॉड्यूल तैयार कर रहे हैं। इस बार हर जिले के टीचरों का अलग ट्रेनिंग प्रोग्राम होगा।
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- ज्योति चौधरी, निदेशक एससीईआरटी गुरुग्राम।
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टीचर ट्रेनिंग के बदलाव से शिक्षा सुधार में मदद मिलेगी। दूसरा टीचरों को पढ़ाने की नई विधाओं का ज्ञान हो सकेगा। इसका असर पठन पाठन पर देखने को मिलेगा।
मुकेश कुमार लावडिया, डीईओ

टीचरों को उनके जरूरत के अनुसार ट्रेनिंग मिलनी चाहिए। इस बदलाव से ट्रेनिंग की महत्ता और बढ़ जाएगी क्यों कि पहले से पठन पाठन की कमियों को चिह्नित कर लिया गया है।
- जितेंद्र भारद्वाज, टीचर नारनौल।
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