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विवि ने नारनौल कालेज के 344 विद्यार्थियों की यूएमसी दर्शायी, विद्यार्थी परेशान

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही घोषित किए गए बीएससी नान मेडिकल के द्वितीय सेमेस्टर रि-अपीयर का परीक्षा परिणाम नारनौल क्षेत्र के विद्यार्थियों के गले नहीं उतर रहा है। इस परीक्षा परिणाम में विवि द्वारा क्षेत्र के 344 विद्यार्थियों की यूएमसी दर्शायी दी गई है। इससे विद्यार्थी अगली कक्षा में दाखिला लेने से वंचित हो गए है। विद्यार्थियों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। इसके समाधान के लिए विद्यार्थी पिछले तीन-चार दिन लगातार अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या को कोई समाधान नहीं निकल रहा है। परेशान विद्यार्थी शनिवार सुबह नारनौल उपायुक्त डॉ. गरिमा से मिले और उनके सामने अपनी समस्या रखी। विद्यार्थियों की समस्या सुनकर उपायुक्त ने मौके पर ही विवि के रजिस्ट्रार से फोन पर वार्तालाप कर उनके परेशानी का दूर करने की बात कही।
उपायुक्त से मिलने पहुंची एकता, अनुराधा, आरती, ललिता, निशा, कुसुम, नीलम, मनीष, राहुल, विशाल सैनी, रोहित, सुनील, विपिन व साहिल आदि विद्यार्थियों ने बताया कि मार्च 2018 में नारनौल के पीजी कॉलेज में सेंटर नंबर 515 में बीएससी नान मेडिकल के द्वितीय सेमेस्टर की रि-अपीयर परीक्षा का आयोजन किया था। जोकि शांतिपूर्वक हुआ। परीक्षा समय अवधि के दौरान किसी परीक्षा अधिकारी या फ्लाइंग टीम सदस्य ने कोई केस नहीं बनाया। बावजूद विवि द्वारा नारनौल सेंटर के 344 विद्यार्थियों की यूएमसी दर्शा दी है।
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मास कॉपी बताया यूएमसी का कारण
विवि द्वारा जारी किए लेटर में 344 विद्यार्थियों की यूएमसी के पीछे मास कापी होने का कारण बताया गया है। मास कॉपी मतलब विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रश्न-उत्तर आपस में हूबहू मिलना पाया गया है।

उपायुक्त ने दिया आश्वासन
विद्यार्थियों की उक्त मामले को लेकर उपायुक्त विवि के रजिस्ट्रार से दूरभाष पर बात कर उनकी समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए। जिस पर रजिस्ट्रार ने विद्यार्थियों को सोमवार को अपने कार्यालय बुलाकर समाधान करने का आश्वासन दिया।
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वर्जन
उक्त मामले को लेकर मदवि से उनके पास लेटर आया है। इसमें यूएमसी का कारण मास कॉपी बताया गया है। परंतु इतने बच्चों की यूएमसी दर्शाना सही नहीं है, क्योंकि एक-दो कमरे में नकल हो सकती है, लेकिन पूरे सेंटर के बच्चों की यूएमसी बनाना स्वाभाविक नहीं है।
- एनएन यादव, कार्यवाहक प्राचार्य पीजी कॉलेज नारनौल।
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