अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
बाल विवाह जैसी बुराइयों को खत्म करने के लिए बुधवार को न्यायिक परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से लेट्स स्टैंड अप कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सरिता गुप्ता की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में जिले के पुजारी व ग्राम स्तरीय बाल निषेध समिति के सदस्यों को इस बुराई के कारण समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति जागरूक किया गया। इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सीजेएम विवेक यादव भी मौजूद थे।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि बाल विवाह समाज के लिए एक अभिशाप है। इस शब्द से ही यह पता चलता है कि जिसकी शादी हो रही है वो एक बच्चा है। समाज के इस कुरीति का जन्म बहुत साल पहले हुआ जब लड़की की बाल सुरक्षा चिंता का विषय था। जब मां-बाप के लिए ये सोचना स्वाभाविक था कि बच्चे की शादी जल्दी कर दो। ताकि अपनी जिम्मेवारियों से मुक्त हो जाएं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह का दूसरा कारण गरीबी को समझा जा सकता है। जब एक परिवार में एक से अधिक लड़कियां होती हैं तो मां बाप ये सोचते हैं कि छोटी लड़की की शादी भी बड़ी लड़की के साथ ही कर दो। ताकि विवाह का खर्चा बचाया जा सके।
गुप्ता ने कहा कि बाल विवाह का तीसरा कारण अशिक्षा व अज्ञानता है। मां-बाप ये समझ नहीं पाते की लड़की का विवाह जल्दी करने से उसका शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है। इस कारण उसे शिक्षा का अवसर भी प्राप्त नहीं हो पाता है। यही कारण है कि आज के दिन न्यायालय में पारिवारिक मामलों की भरमार हो गई है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें लड़की कभी ससुराल गई ही नहीं। कम उम्र में शादी करने से जब लड़की गर्भवती हो जाती है तो उसका अपना व होने वाले बच्चे का जीवन खतरे में पड़ जाता है। अब समय की ये मांग है कि हम सब मिलकर समाज की इस कुरीति को जड़ से खत्म करें। ग्राम स्तरीय बाल विवाह निषेध समिति के सदस्य व शादी करवाने वाले पुजारी बाल विवाह रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस अवसर पर बाल विवाह निषेध अधिकारी सरिता शर्मा तथा विभिन्न पुजारी व ग्राम लेवल एंटी चाइल्ड विवाह समिति के सदस्य मौजूद थे।