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्रदेश में बढ़ा, जिला में घटा बच्चियों के प्रति अपराध

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बच्चियों के प्रति बढ़ रही सतर्कता, घट रहे अपराध
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नारनौल। जिला महेंद्रगढ़ में बच्चियों के प्रति अपराधों में तीन वर्षों में कमी आई है। 2015 में जिले में पोक्सो एक्ट के तहत 40 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं यह 2016 में 32 और 2017 में अब तक 23 मामले दर्ज हुए हैं। इस संबंध में महिला थाना इंचार्ज का कहना है कि जागरूकता लाने के लिए स्कूल-कॉलेजों में सेमिनार का आयोजन किया जाता है।
प्रदेश में बच्चियों के प्रति अपराध का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है, वहीं जिले में इसका ग्राफ कम हो रहा है। इन अपराध करने वालों में बच्चियों के जान पहचान के लोग ज्यादा शामिल होते हैं। जिले में भी अटेली में करीब तीन साल पूर्व 2014 एक दस वर्ष की लड़की के साथ दरिंदगी की थी। यह मामला काफी चर्चा में रहा था। इसके बाद इसमें शामिल चार लोगों में से तीन को फांसी की सजा अदालत सुना चुका है, जबकि एक युवक बरी हो गया था। हालांकि जिला के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो ये अपराध तीन साल में कम ही हुए हैं। 2015 में जिला में पोक्सो एक्ट के तहत 40 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं यह 2016 में 32 और 2017 में अब तक 23 मामले दर्ज हुए हैं। ं जिला में भी कुछ बाल अपराध ऐसे हो चुके हैं, जो चर्चित रहे हैं। इनमें अटेली की जिया हत्याकांड व नारनौल का माधव हत्याकांड शामिल है। पोक्सो एक्ट के तहत जिला में अपराध की संख्या घटी है।
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जिला मुख्यालय पर है महिला थाना, 25 महिलाएं हैं तैनात
जिले में महिलाओं के प्रति हो रहे अपराध से निपटने के लिए जिला मुख्यालय नारनौल में एक महिला थाने की स्थापना तीन साल पूर्व की गई थी। इस थाने में एक महिला इंस्पेक्टर के अलावा 30 कर्मचारियों का स्टाफ है। इसमें से 25 महिलाओं का स्टाफ थाने में है।

महेंद्रगढ़ में भी बनना है महिला थाना
नारनौल मुख्यालय की कनीना व सतनाली से दूरी होने के कारण लोगों की मांग महेंद्रगढ़ में भी महिला थाना खोलने की उठ चुकी है। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा भी कर चुके हैं। इसकी प्रक्रिया विभाग जारी कर चुका है।
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ये है जिले का आंकड़ा
पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुए मामले
वर्ष दर्ज मामले रद्द मामले
2015 40 08
2016 32 06
2017 23 01

समय-समय पर किया जाता है जागरूक
महिला थाना इंचार्ज मीनाक्षी देवी का कहना है कि बच्चियों के प्रति हो रहे अपराध से निपटने के लिए समय-समय पर स्कूलों और कॉलेजों में सेमिनार का आयोजन किया जाता है। वहीं युवा लड़कों को भी इन अपराधों के बारे में बताकर इनसे होने वाली परेशानियों व सजा के बारे में भी बताया जाता है, ताकि लड़के भी ऐसे अपराध न करें। वहीं लड़कियों को इन अपराधों के प्रति जागरूक किया जाता है, ताकि उनके साथ ऐसा न हो सके।
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