कुरुक्षेत्र। आर्य समाज की युवा शाखा सार्वदेशिक आर्यवीर दल के तत्वावधान में गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित राष्ट्रीय जीवन निर्माण एवं आत्मरक्षा शिविर में देश भर से आए युवाओं ने उत्साह का प्रदर्शन किया।
शिविर के विशेष सत्र में युवाओं को पारंपरिक आत्मरक्षा के गुर सिखाते हुए लाठी चलाने (यष्टि संचालन) का सघन प्रशिक्षण दिया गया। सार्वदेशिक आर्यवीर दल के प्रधान संचालक आचार्य नंदकिशोर के नेतृत्व में अनुभवी प्रशिक्षकों ने युवाओं को लाठी का प्रशिक्षण दिया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य आधुनिकता की दौड़ में खो रहे युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ना और उनमें राष्ट्र रक्षा का भाव जगाना है। शिविर के मुख्य मैदान पर सुबह की पहली किरण के साथ ही भगवा ध्वज के साए में युवाओं का जोश देखने लायक था। ‘वंदे मातरम्’ और ‘ओ३म्’ के जयघोष के बीच अनुभवी प्रशिक्षकों देखरेख में युवाओं ने लाठी घुमाने की विभिन्न विधाओं का अभ्यास किया। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को सिखाया गया कि लाठी केवल एक लकड़ी का टुकड़ा नहीं, बल्कि आत्मरक्षा का एक अचूक और सुलभ साधन है। युवाओं ने लाठी के वार, बचाव, पैंतरेबाजी और व्यूह रचना का शानदार प्रदर्शन किया।
सार्वदेशिक आर्यवीर दल न्यास के अध्यक्ष स्वामी देवव्रत सरस्वती ने कहा कि आर्यवीर दल का उद्देश्य समाज में भय का माहौल बनाना नहीं, बल्कि भयमुक्त समाज का निर्माण करना है। लाठी चलाना सिखाने का अर्थ किसी पर अत्याचार करना नहीं, बल्कि अत्याचार के सामने ढाल बनकर खड़े होना है। एक आर्यवीर के हाथ में लाठी समाज की कमजोरियों की रक्षा के लिए होती है।