कुरुक्षेत्र। अधेड़ से लेकर युवाओं तक में धूम्रपान और तंबाकू के सेवन की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। बहुत कम लोग ही तंबाकू छोड़ने के लिए आगे आते हैं। इस बात का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि जिले में पिछले साल केवल 216 लोगों ने ही तंबाकू छोड़ने में दिलचस्पी दिखाई। एलएनजेपी अस्पताल में प्रति माह 30 से 40 लोग ही तंबाकू छोड़ने के लिए काउंसलिंग कराने आते हैं। अस्पताल के मनोचिकित्सक उनको तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। अस्पताल की ओर से उनको तंबाकू छोड़ने के लिए दवा के साथ निकोटिन गम्स (च्विंगम) दिया जाता है।
इस साल तंबाकू निषेध दिवस ‘बच्चों को तंबाकू हस्तक्षेप से बचाना है’ विषय पर मनाया जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में तंबाकू की वजह से हर साल साढ़े 13 लाख और विश्व में 70 लाख से ज्यादा मौतों का कारण तंबाकू बनता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों में 31 से 55 फीसदी मृत्यु होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा धूम्रपान या तंबाकू खाने वाले के प्रजनन अंगों पर भी बुरा असर पड़ता है। वहीं दुनिया में गैर धूम्रपान करने वाले भी करीब नौ लाख लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं। वहीं एनटीसीपी के नोडल अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि आज शुक्रवार को विभाग की ओर कृष्णा नगर गामड़ी में तंबाकू निषेध दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें तंबाकू के सेवन से अंगों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव और हानियों की जानकारी दी जाएगी साथ ही तंबाकू मुक्त पंचायतों के सरपंच को सम्मानित किया जाएगा।