कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में जूट से बने बैग व अन्य उत्पादों के बारे में बताती रे
कुरुक्षेत्र। गीता महोत्सव के सरस मेले में प्लास्टिक मुक्त हरियाणा की मुहिम को चलाए हुए महिलाएं जूट से बने बैग व अन्य उत्पादों को लेकर महोत्सव में पहुंची हैं। इन महिलाओं का कहना है कि प्लास्टिक का हमारे शरीर और पर्यावरण पर बहुत बड़ा दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिए हमें महोत्सव में पॉलिथीन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
जय अंबे स्वयं सहायता समूह से जुड़ी गांव खेड़ी मारंकडा की रेखा ने बताया कि उन्होंने विशेष तौर पर गीता महोत्सव में पर्यटकों के लिए जूट से विभिन्न प्रकार के बैग व अन्य उत्पाद तैयार किए हैं, जो ब्रह्मसरोवर के उत्तर-पश्चिम स्टॉल नंबर 842 पर सजाए हैं। उनके स्वयं सहायता समूह की ओर से पर्यटकों को पॉलिथीन का प्रयोग न करने और जूट से बने बैगों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।
वे बताती हैं कि इन बैगों को बनाने के लिए ऊन के धागे का इस्तेमाल किया गया है और प्लास्टिक का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया है। उनके स्वयं सहायता समूह में कई महिलाएं मिलकर काम करती हैं और उनके समूह की ओर से महिलाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान किए जा रहे हैं। उनके ग्रुप की ओर से ग्राहकों को प्लास्टिक मुक्त हरियाणा के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ स्वच्छ भारत-हमारा भारत का संदेश भी दिया जा रहा है।
रोजगार अपनाकर जीवन बना रही आसान
रेखा का कहना है कि महिलाओं को रोजगार मिलने से अपने परिवार की आजीविका को आसानी से चला सकती हैं। उनकी ओर से बनाए गए जूट के बैग की कीमत 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक रखी गई है। वह पिछले कई साल से इस महोत्सव में आ रही हैं। सरकार की ओर से उनके समूह को जूट से बने समान बनाने का नि:शुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसके साथ-साथ सरकार की ओर से निम्न दरों पर बैंकों के माध्यम से ऋण भी उपलब्ध करवाया गया है।
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में जूट से बने बैग व अन्य उत्पादों के बारे में बताती रे