कुरुक्षेत्र। गुप्त नवरात्रों के अंतर्गत माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां भद्रकाली शक्तिपीठ में वसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। पीठाध्यक्ष पं. सतपाल शर्मा ने कहा कि गुप्त नवरात्र और वसंत पंचमी का एक ही दिन पड़ना अत्यंत विशेष है, क्योंकि नवरात्रों में किया गया पूजन कई गुना फलदायी होता है। वेद ऋचाओं में वसंत ऋतु को ज्ञान और जीवन देने वाली ऋतु कहा गया है, जिसे ऋतुराज और मधुमास भी कहा जाता है।
पीठाध्यक्ष ने बताया कि प्रातः 11 बजे मां भद्रकाली शक्तिपीठ में मां सरस्वती के निमित्त विशेष हवन किया गया। सर्वप्रथम श्री देवीकूप पर पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद आदिशक्ति मां सरस्वती का ध्यान-मनन कर बीज मंत्र से पूजन किया गया। मां सरस्वती को पीले वस्त्र, पीले पुष्प, सरसों के फूल, पीले पुष्पों की माला और नारियल अर्पित किया गया। इस अवसर पर वेद, उपनिषद, पुराण, देवी भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथों और ढोल, तबला, हारमोनियम जैसे वाद्य यंत्रों का भी पूजन किया गया। भक्तों ने पीले वस्त्र धारण कर मां शारदा को लड्डू, पीले पेड़े, हलवा, केला, केसरयुक्त पदार्थ, पीले मीठे चावल आदि का भोग अर्पित किया।