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Kurukshetra News: मां के छठे स्वरूप की आराधना करने से पूरी होती हैं मन्नतें

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कुरुक्षेत्र। मां कात्यायनी देवी मंदिर में स्थापित मां का स्वरूप। संवाद
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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी के पवित्र ब्रह्मसरोवर के तट पर स्थित मां कात्यायनी देवी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां मां कात्यायनी देवी के दर्शन करने के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। शास्त्रों के मुताबिक मां कात्यायनी देवी भगवान कृष्ण की इष्ट देवी हैं, जिसके चलते गोपियां भी भगवान कृष्ण को पाने के लिए मां की पूजा अर्चना करती थीं और महाभारत का युद्ध शुरू होने से पहले अर्जुन ने मां कात्यायनी की पूजा करते हुए विजयश्री का आशीर्वाद मांगा था।
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इस मंदिर में मां कात्यायनी का छठा स्वरूप विराजमान है, जिसकी आराधना कर मां के भक्त मन्नतें पूरी होने की कामना करते हैं। मन्नत पूरी होने पर इस मंदिर में नारियल, चुनरी चढ़ाने की काफी प्राचीन परंपरा है। मां कात्यायनी की पूजा से जहां कुंवारी कन्याओं को अच्छा वर मिलता है तो वहीं महिलाओं को पुत्र की प्राप्ति भी होती है। इसके लिए महिला श्रद्धालु व्रत रखकर मां की उपासना करती हैं। इस मंदिर में पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती और हरियाणा के पूर्व राज्यपाल महावीर प्रसाद भी पूजा कर चुके हैं। इस मंदिर के उत्तर में भैरव, दक्षिण में हनुमान और भटक भैरों स्थित है।




मन्नत पूरी होने पर नारियल, चुनरी चढ़ाने की परंपरा

मंदिर के पुजारी पंडित बलराम गौतम ने बताया कि मां कात्यायनी देवी भगवान कृष्ण की इष्ट देवी हैं, भगवान श्रीकृष्ण मां कात्यायनी की पूजा करते थे और महाभारत का युद्ध होने से पहले भी मां की पूजा की थी। मंदिर में मां के दर्शन कर प्रार्थना करने से मन्नत पूरी होती हैं और मन्नत पूरी होने पर मां को नारियल, चुनरी चढ़ाया जाता है, जो कि काफी प्राचीन परंपरा है।

कुरुक्षेत्र। मां कात्यायनी देवी मंदिर में स्थापित मां का स्वरूप। संवाद

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