कुरुक्षेत्र। प्रवचन देते स्वामी ज्ञानानंद।
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण कृपा गोशाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि भागवत कथा जीवन में वास्तिवक सरसता लाती है। यह कथा परमात्मा के रस का भंडार है। गोपी वह वृत्ति है, जिससे कृष्ण को मिलने की चाह पैदा होती है, गोपी रुदन में भी कृष्ण से मिलने की लालसा है। जीव मात्र में कृष्ण से मिलने की लालसा होती है। हमारा सनातन, अध्यात्म कोरा ज्ञान व अंधविश्वास नहीं, बल्कि वास्तविक विज्ञान है। जीवन में सभी जीव सुख-शांति चाहते है, सत्संग सुमिति देता है। गीता मनीषी ने कहा कि भागवत कथा दिव्यता भाव की कथा है।
उन्होंने कहा कि राधा प्रेम है और कृष्ण आनंद है। जहां प्रेम होगा वहीं आनंद होगा। त्योहार हमारी सनातन परंपरा का गौरव है। पंरपराएं सुरक्षित रहे, इसलिए त्योहार की दिव्यता बनाई रखनी चाहिए। आज त्योहारों में वृत्तियां आ गई है, जिन्हें दूर करने की जरूरत है।
व्यासपीठ से भागवत कथा के समापन दिवस पर वृंदावन धाम से आए गोविंद मोद्गिल शास्त्री ने अत्यंत भावपूर्ण रस से भागवत कथा वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कभी-कभी हमें ठाकुर जी के समक्ष मौन भी हो जाना चाहिए।
मंगलवार की भागवत कथा का शुभारंभ यजमान के रूप में आए सैन समाज के प्रधान काला सिंह, जय श्री श्याम गोशाला अभिमन्यु पुर के प्रधान महावीर सिंगला, जसवंत सैनी पूर्व सरपंच झिंझरपुर, मथुरा से आए गोविंद वल्लभ ने दीप प्रज्वलित करके किया। संवाद