कुरुक्षेत्र। मार्कंडेय नगरी शाहाबाद में पांच दशक तक कांग्रेस-भाजपा का वर्चस्व कायम रहा। फिर वर्ष 2019 का विधानसभा चुनाव आया तो करीब 10 महीने पहले साल 2018 में गठित जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने अपने पहले ही चुनाव में भाजपा व कांग्रेस की जीत का तिलिस्म तोड़ दिया। अभी तक इस क्षेत्र से कांग्रेस छह तो भाजपा चार बार सीट जीतने में कामयाब हुए हैं।
साल 2019 के विस चुनाव में जजपा के रामकरण काला ने 69,233 वोट हासिल कर अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा सरकार में मंत्री रहे कृष्ण बेदी को दोगुने से ज्यादा 37,127 वोट के अंतर से मात दी, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी अनिल धंतौड़ी को मात्र 18,849 वोट ही हासिल हुए। इसके पहले साल 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बावजूद भाजपा के कृष्ण बेदी ने इनेलो के रामकरण काला को मात्र 562 वोट के अंतर से हराया था। भाजपा की सरकार बनने पर बेदी राज्यमंत्री बनाया गया था।
इसके पहले शाहाबाद सीट पर एक दशक तक कांग्रेस का दबदबा बना रहा। साल 2005 में खरैती लाल ने 36,377 वोट लेकर इनेलो के ओंकार सिंह 1,912 और अगली 2009 के विस चुनाव में कांग्रेस के अनिल धंतौड़ी ने इनेलो के ही जितेंद्र कुमार को 3,741 वोट से मात दी। साल 2009 के चुनाव में कांग्रेस को 30,843 और इनेलो को 27,102 वोट मिले थे। साल 2000 के चुनाव में भाजपा के कपूर चंद ने 28,490 वोट लेकर कांग्रेस के प्रत्याशी तारा सिंह को 3,994 मत के अंतर से शिकस्त दी थी।
2009 से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित
साल 1967 से 2005 तक शाहाबाद विधानसभा सीट सामान्य वर्ग के लिए खुली रही, मगर साल 2009 में इस सीट को अनुसूचित जाति (एससी वर्ग) के लिए आरक्षित कर दिया गया। साल 2009 में अनुसूचित जाति से इस सीट से कांग्रेस के अनिल धंतौड़ी, 2014 में भाजपा के कृष्ण बेदी और 2019 में जजपा के रामकरण काला विधायक रहे। अभी 2024 के चुनाव में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। अभी भाजपा से सुभाष कल्साना और कांग्रेस से रामकरण काला चुनाव के मैदान में आमने-सामने हैं।
जगदीश चंद बने थे पहले विधायक
हरियाणा (एक नवंबर 1966) के गठन के बाद राज्य में पहली बार साल 1967 में हुए चुनाव में कांग्रेस के जगदीश चंद यहां से पहले विधायक चुने गए। इसके अगले ही साल हुआ चुनाव भी उन्होंने ही जीत लिया था। साल 1972 में कांग्रेस से अमीर चंद, 1977 में जेएनपी से सुरिंद्र सिंह, 1982 में कांग्रेस से तारा सिंह, 1987 में सीपीआई से हरनाम सिंह, 1991 में भाजपा से खरैती लाल, 1996 से 2000 तक भाजपा से कपूर चंद को विधायक चुना गया था। कांग्रेस ने कुल छह बार साल 1967, 1968, 1972, 1982, 2005 और 2009 तो भाजपा ने लगातार तीन बार 1991, 1996, 2000 के बाद 2014 में चौथी बार जीत दर्ज की थी।