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जब-जब हुई धर्म की हानि तब जन्मे प्रभु : पाराशर

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कुरुक्षेत्र। सेक्टर तीन के शिव मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इसमें श्रद्धालु जमकर थिरके। इस मौके पर पूरा कथा परिसर भगवान श्री कृष्ण के जयकारों तथा नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की जय से गुंजायमान हो उठा। कथा के दौरान कथाव्यास रमेश पाराशर ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने कहा जब-जब अत्याचार और अन्याय बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब कंस ने सभी मर्यादाएं तोड़ दी तो प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। रमेश पाराशर ने अपने संबोधन में बताया कि भगवान विष्णु ने स्वयं वामन अवतार के रूप में आकर दैत्य राजा बली का अभिमान चूर किया, श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर कंस का वध किया, भगवान राम ने रावण का वध किया और नरसिंह अवतार ने हिरण्यकश्यप का वध किया।
उन्होंने कहा कि जब-जब इस पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है तब तब भगवान भी किसी न किसी रूप में अवतार लेकर इस पृथ्वी को अत्याचारों से मुक्त करते हैं। श्रीकृष्ण जन्म की कथा का वर्णन करते हुए गुरुजी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि के समय कंस की कारागार में हुआ था। श्री कृष्ण ने बड़े होकर अत्याचारी कंस का वध किया और अपने माता-पिता (देवकी-वासुदेव) को कारागार से मुक्त करवाकर पृथ्वी को अत्याचारों से मुक्त किया। इस प्रसंग से पूर्व वामन अवतार की कथा सुनाते हुए गुरुजी ने बताया कि विष्णु भगवान ने स्वयं वामन का वेश बनाकर राजा बलि से तीन पग भूमि दान के रूप में मांगकर सारी पृथ्वी को नाप लिया और अंत में राजा बलि के सेवाभाव को देखकर उसे पाताल लोक का अधिपति बनाया। इस मौके पर वेदपाठी मनदीप जोशी, वेदपाठी सोहन पराशर, वेदपाठी मुकेश शर्मा वशिष्ठ, वेदपाठी बलराज शर्मा ने वेद मंत्रों सहित विधिवत रूप से पूजा करवाई। इस अवसर पर मंदिर सभा प्रधान जोगिंदर चौहान, संतोष कम्बोज, लवनीश अग्रवाल, मंजू मक्कड़ आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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