गांव फतुपुर में 500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली जिस आयुष विश्वविद्यालय की आधारशीला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2019 में रखी थी, उसका अभी तक कांट्रेक्ट भी नहीं हुआ। 94.5 एकड़ पंचायती जमीन पर बनने वाले देश के एकमात्र श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय का प्रारूप कैसा होगा ? इस बारे में कोई योजना नहीं बनाई गई। सरकार की ओर से इस विश्वविद्यालय पर 500 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जाएगा। सरकार द्वारा वर्ष 2019-20 के लिए 100 करोड़ रुपए के बजट को प्रशासनिक अनुमति दी गई थी। 75 करोड़ रुपये भवन निर्माण और 25 करोड़ रुपये विश्वविद्यालय कार्यालय खर्च के लिए तय किए गए थे। निर्माण कार्य शुरू होना तो दूर, आज तक विश्वविद्यालय की चार दीवारी का निर्माण कार्य भी पूरा नहीं हो सका। वैसे विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शीघ्र योजना बना टेंडर के अनुसार कंपनी के साथ कॉन्ट्रेक्ट करने का दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन आयुष विश्वविद्यालय बनकर कब तैयार होगा, इसका फिलहाल किसी के पास कोई जवाब नहीं। बता दें कि प्रधानमंत्री ने 12 फरवरी 2019 को कुरुक्षेत्र में स्वच्छ शक्ति कार्यक्रम में आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी थी। आयुष विश्वविद्यालय में आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र, विशाल अस्पताल, लाइब्रेरी और हर्बल गार्डन स्थापित करने की घोषणा की गई थी। बताया गया था कि इस विश्वविद्यालय में आयुष की सभी शाखाओं के उत्कृष्ट अध्ययन और इलाज की व्यवस्था की जाएगी। यही नहीं, इसमें आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपथी के ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट लेवल के विभाग बनाए जाएंगे। सरपंच शमशेर सिंह ने बताया कि आयुष विश्वविद्यालय की वर्ष 2017 में घोषणा होने पर ग्राम पंचायत फतुपुर द्वारा करीब 100 एकड़ जमीन 33 वर्ष के लिए सरकार को दी थी, जिसपर विश्वविद्यालय का निर्माण किया जाना है। फिलहाल विश्वविद्यालय की चार दीवारी का कार्य चला हुआ है।
श्रीकृष्णा आयुष विवि के कुलपति डा. बलदेव धीमान का कहना है कि विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य शुरू कराने संबंधित शनिवार को ही बैठक बुलाई गई थी। प्रशासन की ओर से आनलाइन टेंडर निकाला गया था, जिसमें 4 से 5 कंपनियों ने आवेदन किया है। तय मानकों पर खरा उतरने वाली कंपनी के साथ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कांट्रेक्ट (पीएमसी) होगा। उन्हें उम्मीद है कि मार्च तक सारी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके पश्चात ही नक्शा नवीस से विश्वविद्यालय के प्रारूप को तैयार जाएगा।