कुरुक्षेत्र। रामलीला मंचन करते बाल कलाकार। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। गीता ज्ञान संस्थानम् में रविवार को अंतिम दिन रामलीला के विभिन्न प्रसंगाें का मंचन किया गया। अंतिम दिन की रामलीला का शुभारंभ भक्त शिरोमणि शबरी के आश्रम प्रभु श्रीराम के पदार्पण से हुआ।
राम ने जाति, वर्ग, वर्ण से नहीं, हृदय में पवित्रता धारक प्रत्येक मनुष्य को अपना सर्वप्रिय भक्त बताते हुए शबरी के झूठे बेरों का रसास्वादन किया तो पंडाल श्रीराम के जयकारों से गूंजने लगा। पवन पुत्र हनुमान के प्रवेश से लीला की रोचकता और आकर्षण में वृद्धि हुई। जनकनंदिनी सहित प्रभु श्रीराम लक्ष्मण के अयोध्या पहुंचते ही भरत मिलाप और उत्सव आरंभ हुए। प्रभु श्रीराम के राज तिलक और प्रजा के सर्वोत्तम कल्याण और सुख के लिए रामराज की स्थापना के मंचन के साथ विराम लिया।
अंतरराष्ट्रीय रामलीला महोत्सव एसोशिएशन के आयोजित तीन दिवसीय संपूर्ण रामायण रामलीला के समापन पर स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि लाखों वर्ष बीत जाने पर भी रामलीलाओं का मंचन होना, यह दर्शाता है कि रामकथा एक सारस्वत प्रेरणा है। इस अवसर पर जस्टिस बृजेश सेठी, जस्टिस डॉ. ओपी, रेनू भाटिया अध्यक्ष हरियाणा बाल कल्याण बोर्ड, देव त्यागी, कमल प्रकाश ऑस्ट्रेलिया, कुरुक्षेत्र के समाजसेवी प्रतीक सुधा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।