जब अनाज मंडी गेहूं की भरने लगेगी तभी निर्धारित एजेंसियां गेहूं खरीदेंगी, इससे पहले कुछ ही संख्या में गेहूं लेकर आने वाले किसानों की गेहूं की खरीद नहीं होगी। भले ही कुछ किसानों को दूसरे सभी कार्य छोड़ अपने गेहूं बेचने के लिए कई दिनों तक मंडी में ही इंतजार क्यों न करना पड़े। शायद यही कारण है कि गेहूं अनाज मंडी में पहुंचने लगा, लेकिन न तो गेहूं खरीद वाली एजेंसी ही आ रही है और न ही आढ़तियों के पास इस गेहूं को भरने के लिए बारदाना ही पहुंच पाया है। हालात यह है कि थानेसर अनाज मंडी के जहां गेहूं लेकर आए किसानों को गेहूं खरीद की शुरुआत में ही धक्का लगने लगा। इसी के साथ ही गेहूं खरीद को लेकर प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन द्वारा पिछले एक माह से किए जा रहे दावों की गेहूं आवक की शुरुआत में ही हवा निकलने लगी है। हालांकि प्रदेश सरकार ने गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से शुरू किए जाने की घोषणा की, जिसके साथ ही जिला प्रशासनिक अधिकारियों ने भी गेहूं खरीद की तैयारियों के बड़े-बड़े दावे कर दिए। लेकिन हर सीजन की तरह इस बार भी किसानों को अनाज मडियों में बेबसी का ही सामना करने की आशंका होने लगी है। अनाज मंडी में खरीद शुरु होने के दूसरे दिन खेड़ी ब्राह्मण निवासी रामकुमार 350 कट्टे गेहूूं लेकर पहुंचा तो रविवार को तीसरे दिन ईशाकपुर निवासी सुभाष अपनी लगभग 24 क्विंटल गेहूं लेकर अनाज मंडी पहुंचा तो दोपहर बाद एक और किसान लगभग 15 क्विंटल गेहूं लेकर पहुंचा। लेकिन इन किसानों को उस समय गहरा झटका लगा जब देर सायं तक भी उनकी गेहूं के पास कोई अधिकारी व कर्मचारी नहीं पहुंचा। संबधित आढ़तियों ने भी हाथ खड़े करते हुए बारदाना होने से इंकार कर दिया। सुभाष को गेहूं में आढ़ती ने ही नमी बताकर सुखाने के लिए कहा तो रामकुमार ने अपनी गेहूं को आढ़ती से ही कट्टों का प्रबंध कर उनमें भरवाया। इन किसानों की गेहूं खुले आसमान के नीचे ही खरीद एजेंसियों के अधिकारियों का इंतजार करती रही।
क्या कहते हैं किसान
ईशाकपुर निवासी किसान सुभाष का कहना है कि वह सुबह ही गेहूं लेकर यहां पहुंचा लेकिन देर सायं तक भी गेहूं खरीद तो दूर उसकी सुध तक नहीं ली गई। वह अब तक गेहूं लाने वाला दूसरा किसान है, लेकिन उन्हें दिनभर गेहूं की रखवाली व अधिकारियों की बाट जोहकर महसूस हुआ है कि सरकार व अधिकारियों के दावे खोखले ही होते हैं। इस बार भी किसानों को गेहूं बेचने के लिए भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। आढ़ती ने अपने स्तर पर ही गेहूं को सूखाने के लिए कहा है, लेकिन किसान इस तरह कई-कई दिनों तक सीजन में कार्य छोड़कर मंडियों में कैसे बैठेंगे। वहीं उनके बाद गेहूं लेकर आए किसान का कहना है कि किसान का कोई भला करने वाला नहीं है। मंडियों में भी उसे हर सीजन में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है और इस बार भी ऐसी ही शुरुआत हो चुकी है। उधर दिनभर बादल रहने से मौसम की मार उन पर फिर से पड़ने की आशंका भी होने लगी है।
सफाई व्यवस्था को लेकर जागे अधिकारी
अनाज मंडियों में सफाई व्यवस्था को लेकर भी संबधित अधिकारी गेहूं खरीद शुरू होने के तीसरे दिन जागे। वह भी तब जब मार्केटिंग बोर्ड के सचिव सतपाल शर्मा शनिवार को यहां पहुंचे। उन्होंने थानेसर व पीपली अनाज मंडियों का दौरा किया, लेकिन वह सफाई व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हो पाए। उन्हंोंने तत्काल ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त किए जाने का आदेश दिए तो दूसरी कमियां भी दूर करने को कहा। इसी का ही असर रहा कि रविवार को भी थानेसर अनाज मंडी में दिनभर सफाई किए जाने का कार्य चलता रहा तो खरीद केंद्रों पर भी निर्देश दिए गए। मार्केटिंग बोर्ड के डीएमईओ राजीव चौधरी, मंडी सुपरवाईजर सुरेंद्र सिंह व अनिल पाल की टीम ने थानेसर मंडी के साथ-साथ अमीन, किरमच व बारना स्थित खरीद केंद्रों पर भी की गई सफाई का जायजा लिया। वहीं थानेसर मंडी के मुख्य द्वार पर भी लाइटें लगाए जाने का कार्य संबधित अधिकारियों को रविवार को याद आया, जिसके बाद कर्मचारी दिनभर लाईट व्यवस्था को दुरुस्त करते रहे।
एजेंसियों द्वारा खरीद न किया जाना बड़ी लापरवाही : गौरव आर्य
मार्केट कमेटी सचिव गौरव आर्य अनुसार 1 अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हुई। आदेशों व नियमों के अनुसार इसी दिन से ही संबंधित खरीद एजेंसियों को यहां पहुंचना चाहिए था। लेकिन तीसरे दिन भी कोई एजेंसी अनाज मंडी नहीं पहुंची, जो गलत है। उन्होंने बताया कि सभी एजेंसियों ने अतिरिक्त उपायुक्त के समक्ष स्पष्ट किया गया था कि वह पहले दिन से ही खरीद शुरू कर देंगी, इसके बावजूद भी तीसरे दिन तक गेहूं की आवक के बावजूद खरीद शुरू न किया जाना बड़ी लापरवाही है। इससे किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। वह उच्चाधिकारियों को सोमवार को इससे अवगत करवाएंगे और अनुरोध किया जाएगा कि गेहूं खरीद सुचारू करवाई जाए। उन्होंने बताया कि बारदाने को लेकर भी संबधित एजेंसी से संपर्क किया गया है, उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही बारदाना पहुंच जाएगा। उन्होंने बताया कि हर सीजन में गेहूं खरीद शुरु होने के कई दिन बाद ही बारदाना पहुंचता है, जिससे भी किसानों को ही परेशान होना पड़ता है।
सोमवार को मंडी में पहुंचेगा बारदाना : गुप्ता
हैफेड एजेंसी के मैनेजर पारस गुप्ता ने बताया कि वह रविवार को थानेसर अनाज मंडी में गए थे, लेकिन कुछ ही ढेरियों गेहूूं पहुंची है। यह गेहूूं नमी वाली थी, जिसके चले उनकी खरीद नहीं हो पाई है। बारदाना भी एजेंसियों के पास पहुंच चुका है और सोमवार को मंडी में पहुंचा दिया जाएगा।
इस्माइलाबाद में भी नहीं हुई खरीद
इस्माईलाबाद। प्रदेश सरकार के आदेशानुसार प्रदेश में गेहूं खरीद का कार्य केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर एक अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन यह केवल कागजों तक ही सीमित है वास्तविकता इससे कोसो दूर है। खरीद के तीसरे दिन भी कोई भी सरकारी खरीद एजेंसी गेहूं खरीद के अनाजमंडी में नहीं पहुंची। जबकि अनाजमंडी में करीब 3 हजार क्विंटल गेहूं की आवक हो चुकी है। जिसको लेकर किसानों में भारी रोष व्याप्त है। किसान जयपाल खराबगढ़, विष्णुदत्त जंधेडी, धर्मसिंह धगडौली, प्रदीप सैनी रोशनपुर, अश्वनी, पृथ्वी सिंह रोशनपुर आदि ने बताया कि 1 अप्रैल से गेहूं कटाई का कार्य शुरू किया, लेकिन सरकारी खरीद के तीसरे भी कोई भी सरकारी खरीद एजेंसी गेहूं खरीदने नहीं पहुंची। जिसके कारण वे पिछले दो-तीन दिन से अनाजमंडी में धक्के खा रहे हैं किसानों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही सरकारी खरीद शुरू नहीं की गई तो वे अपना अनाज हाईवे पर डाल देंगे, जिसकी जिम्मेवारी सरकार की होगी।
क्या कहते है एफएसई
जब इस बारे में एफएसई घनश्याम दास से बात कि तो उन्होंने कहा कि दो दिन से गेहूं खरीद का कार्य सुचारू रूप से नहीं चल रहा है। क्योंकि जो गेहूं मंडी में बिकवाली के लिए आ रहा है वह सरकारी मापदंडों पर खरा नहीं उतर रहा है। उसमें नमी की मात्रा है। सोमवार से गेहूं खरीद का कार्य सुचारू रूप से चलाया जाएगा। किसानों को गेहूं बेचने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।