जिले भर में वीरवार और शुक्रवार को इंद्रदेव जमकर बरसे। बुधवार रात से ही शुरू हुई बारिश का सिलसिला शुक्रवार सुबह भी जारी रहा। इसमें वीरवार को अधिक बारिश हुई। इन दो दिनों में जिले भर में 101 एमएम बारिश दर्ज की गई। सबसे तेज बारिश थानेसर में 74 एमएम हुई तो सबसे कम बारिश पिहोवा में 30 एमएम दर्ज की गई।
कृषि विभाग के अनुसार लाडवा में 64 एमएम, शाहाबाद में 36 और बाबैन ब्लॉक में 47 एमएम बारिश हुई। तेज बारिश होने से खेतों से लेकर शहर की सड़कें भी पानी से लबालब हो गई। इससे राहगीरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश ने नगर परिषद की पानी निकासी की भी पोल खोल दी तो वहीं सेक्टरों में महज एक माह पहले ही सड़कों के भरे गए गड्ढे भी पहले से बदतर हालात में हो गए, जिन्हें देख सेक्टरवासी हैरान रह गए। बारिश से शहर की अनेक कॉलोनियों की सड़कों पर पानी भर गया। वीरवार को दिन भर तो शुक्रवार को करीब दोपहर तक बाजारों व सार्वजनिक स्थलों तक लोगों की आवाजाही न के बराबर रही।
बारिश होने से जहां गेहूं की फसल में फायदा बताया जा रहा है वहीं सब्जी की फसलों में भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इससे सब्जी उत्पादक किसानों में चिंता दिखाई दे रही है तो वहीं गेहूं उत्पादक किसानों की मानें तो बारिश से पानी की पूर्ति के साथ-साथ पीला रतुआ जैसी कई प्रकार की बीमारियां भी गेहूं से साफ हो गई है।
दोपहर को खिली धूप तो मिली राहत
दो दिन से हो रही बारिश के बाद शुक्रवार दोपहर को बारिश रुकने व धूप खिलने से लोगों को राहत मिली। धूप खिलने के जहां नीचे के क्षेत्रों से भी पानी कम हुआ तो लोग धूप सेंकते हुए भी दिखाई दिए। धूप खिलने से सर्दी से भी राहत मिल पाई, वहीं सांय को फिर हल्के बादल छा गए।
गहराई के खेतों से जल्द करें पानी निकासी : डॉ. कर्मचंद
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि दो दिनों में जिले भर में जमकर बारिश हुई। इससे गेहूं की फसल में फायदा है तो वहीं सब्जी की फसलों में नुकसान से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सब्जी की फसल के साथ-साथ गेहूं की गहराई वाली फसलों से किसानों को पानी की जल्द निकासी करनी चाहिए। पानी खड़ा रहने से गेहूं की फसल का रंग पीला पड़ सकता है तो वहीं अन्य नुकसान भी हो सकता है।