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Kurukshetra News: मारकंडा नदी में 27,700 क्यूसेक पहुंचा जलस्तर, सात गांव जलमग्न

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गांव कठवा में जाने के लिए ग्रामीणों को इस तरह तय करना पड़ा सफर। 
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कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। मारकंडा नदी ने रविवार देर रात से सोमवार तक रौद्र रूप धारण कर लिया। कालाअंब व नाहन में तेज व लगातार बारिश के चलते मानसून सत्र में पहली बार जलस्तर साढ़े 27 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान से करीब दो हजार क्यूसेक अधिक माना जा रहा है। इससे आसपास के सात गांव जलमग्न हो गए हैं।
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सबसे ज्यादा असर गांव कठवा में पड़ा है, जहां से सड़क का करीब 100 फीट हिस्सा पानी में बह गया तो लोगों की आवाजाही भी ठप हो गई। हजारों एकड़ फसल भी जलमग्न हो गई जिसमें नुकसान की आशंका मानी जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक अंबाला के हेमामाजरा के समीप से ही नदी का पानी तटबंध न होने के चलते ओवरफ्लो होकर खेतों में बहने लगा, जो बढ़ता ही रहा और यह उक्त गांवों के एरिया तक पहुंच गया।
नदी के बढ़े जलस्तर का मुख्य असर कठवा के साथ-साथ गांव कलसाना, गुमटी, मलकपुर, तंगोर, पट्टी जामड़ा व मुगलमाजरा में देखने को मिला। ग्रामीणों की मानें तो कठवा और तंगौर में ही साढ़े पांच हजार एकड़ पानी की मार में आ गई है जबकि अन्य गांव की फसलों में भी नुकसान की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कठवा, कलसाना व मलकपुर सहित कई गांवों की मुख्य सड़कों पर नदी का पानी बहता रहा जिससे लोगों की राह कठिन हो गई।
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स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे : नदी के खेतों व गांवों तक पहुंचे पानी ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और वहीं सड़कें भी लबालब हैं। कठवा के पास सड़क का एक हिस्सा पानी में बह गया जिससे यहां के बच्चों का स्कूलों तक पहुंचना ही छूटने लगा। हालांकि ग्रामीणों ने ट्रैक्टरों के जरिये इन सड़कों से आवाजाही जारी रखने का प्रयास किया लेकिन करीब तीन से चार फीट पानी के चलते हादसे की आशंका बनी रही।
ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे। वहीं गांव पट्टी जामड़ा में सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और कई घर भी जलमग्न हो गए और लोगों को कहीं बाहर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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