फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

न्याय के लिए इंतजार हुआ लंबा, कोर्ट खुलने का इंतजार

विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना के चलते कोर्ट के कामकाज पिछले डेढ़ साल से प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि कोरोना पर कुछ नियंत्रण के बाद जनवरी 2021 में इन्हें खोल दिया गया था, लेकिन दो तीन माह बाद फिर से संक्रमण बढ़ने पर कोर्ट बंद करना पड़ा। ऐसे में एक ओर जहां लोगों को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इससे कई जूनियर अधिवक्ताओं ने तो अपना पेशा की बदल दिया है। जिला बार एसो. ने भी सरकार से वकीलों के लिए आर्थिक सहायता की मांग की है।
विज्ञापन

जिले में 17-18 कोर्ट हैं, जिनमें 6 सेशन और बाकी लोवर हैं। इन दिनों कोर्ट में सिर्फ महत्वपूर्ण केसों की ही सुनवाई की जा रही है, जिनमें वर्चुअल और फिजिकल दोनों प्रकार से सुनवाई के विकल्प हैं। फिजिकल में सिर्फ पीड़ित और अधिवक्ता ही कोर्ट में जज के सामने पेश हो सकते हैं। अन्य रूटीन के केस अदालतों में लंबित हैं, जिन पर फरियादियों को सिर्फ तारीख मिल रही है। -संवाद
सरकार से 50 लाख आर्थिक सहायता की मांग : गुरतेज
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान गुरतेज सिंह शेखों ने बताया कि कोरोना के चलते कोर्ट बंद रहने से अधिवक्ताओं को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है। इस दौरान कई अधिवक्ताओं की कोरोना के कारण मौत भी हो चुकी है। वेलफेयर फंड खाली हो चुका है। आय का कोई अन्य साधन नहीं है, जिससे ऐसे परिवारों और संक्रमित अधिवक्ताओं की आर्थिक सहायता की जा सके। उन्होंने सरकार से जिला बार एसोसिएशन को 50 लाख की आर्थिक मदद देने की मांग की है।
विज्ञापन

60 प्रतिशत अधिवक्ताओं के पास नहीं दूसरा विकल्प : परमजीत
जिला बार एसोसिएशन के उपप्रधान परमजीत सैनी ने कहा कि कोर्ट पिछले साल मार्च माह से बंद हैं। हालात सुधरने पर बार एसोसिएशन की मांग पर 14 जनवरी 2021 को फिर से कोर्ट खुले, लेकिन कोरोना की बढ़ती दूसरी लहर के कारण इसे फिर से बंद कर दिया गया। कुरुक्षेत्र कोर्ट में करीब एक हजार अधिवक्ता हैं। सबके पास इस समय आर्थिक संकट खड़ा है। उनकी मांग है कि जल्द से जल्द कोर्ट खोल दी जाए।
जूनियर अधिवक्ताओं ने किया प्रोफेशन चेंज : साधुराम
जिला बार एसोसिएशन के सचिव साधुराम शर्मा ने कहा कि कोरोना के कारण कई माह से कोर्ट बंद हैं। ऐसे में कुछ जूनियर अधिवक्ता अपना प्रोफेशन तक बदल चुके हैं। यदि कोर्ट में क्लाइंट ही नहीं आएंगे तो यहां वकील भी क्या करेंगे। इस समय फाइलिंग तो हो रही है, लेकिन स्टेटमेंट बंद हैं। एसोसिएशन ने जूनियर अधिवक्ताओं को 5000 रुपये प्रति माह आर्थिक मदद देने की भी मांग की है।
वकीलों की समस्याओं के समाधान का प्रयास : हिमांशु
जिला बार एसोसिएशन के सह सचिव हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि हाईकोर्ट ने ऑनलाइन का सिस्टम बनाया है, लेकिन इसमें भी जरूरी केसों की ही सुनवाई हो रही है। वकीलों की समस्या के समाधान के लिए एसोसिएशन हर संभव प्रयास कर रही है। किसी भी अधिवक्ता को कोई भी समस्या आती है तो उसका एसोसिएशन द्वारा अपने स्तर पर समाधान किया जा रहा है।
न्याय के लिए करना पड़ रहा इंतजार : अखिल वर्मा
जिला बार एसोसिएशन के कैशियर अखिल वर्मा ने कहा कोरोना के कारण बंद हुए कोर्ट से लोगों को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ केस ऐसे भी होते हैं, जिनकी सुनवाई के एक सप्ताह से भी कम समय में फैसला हो जाता था, लेकिन अब इन केसों को छह-छह माह की तारीख मिल रही है। अधिवक्ताओं का काम बिल्कुल छिन चुका है। ऐसे में आर्थिक तंगी से जूझ रहे अधिवक्ताओं की मदद होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें