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चौरी-चौरा कांड और असहयोग आंदोलन की दिखाई झलक

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कुरुक्षेत्र। कलाकृति भवन में चौरी-चौरा संग्राम नाटक का मंचन करते कलाकार। - फोटो : Kurukshetra
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हरियाणा कला परिषद के कला कीर्ति भवन में थियेटरवाला नाट्य दल बनारस के कलाकारों ने सोमवार को गोरखपुर के चौरा चौरी चौरा कांड और महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन की प्रस्तुति दी। हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन और अतिरिक्त निदेशक महाबीर गुडडू ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, वाराणसी केंद्र के निदेशक रामजी बाली द्वारा लिखे व निर्देशित नाटक का का शुभारंभ किया। मंच का संचालन मीडिया प्रभारी विकास शर्मा ने किया। नाटक में दिखाया गया कि चौरी चौरा कांड महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के समय हुआ था, चार फरवरी सन 1922 को असहयोग आंदोलन के समर्थन में तैयारी के साथ कई जत्थे निकले थे। आंदोलनकारियों ने यह तय किया था कि अंग्रेज कितना भी अत्याचार करें पीछे नहीं हटा जाएगा। उस दौरान सेवकों को अलग-अलग जत्थे मे बांट दिया गया था। लोगों ने ब्रम्हपुर में स्थापित कांग्रेस कार्यालय से चौरी चौरा की ओर प्रस्थान किया।
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करीब 1000 से ज्यादा लोग चौरी चौरा मार्केट की तरफ बढ़ रहे थे और लोग अंग्रेज सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी कर रहे थे। देखते देखते भीड़ बढ़ने लगी थी। तभी वहां दरोगा गुप्तेश्वर सिंह अपने अन्य सिपाहियों के साथ पहुंचा। पुलिस को देख भीड़ ने नारेबाजी तेज कर दी। इस पर पुलिस वालों ने हवा में फायरिंग करनी शुरू कर दी। इससे भीड़ और उग्र हो गई। भीड़ को उग्र होता देख पुलिस वालों ने आंदोलनकारियों पर गोलियां चला दी, जिसमें 10 से ज्यादा आंदोलनकारियों की मौत हो गई तो कई घायल हो गए थे। पुलिस वालों की गोलियां खत्म हो गई। वो थाने की ओर भागे। यहां पुलिस वालों ने खुद को थाने के अंदर बंद कर लिया। हर तरफ हाहाकार मच गया था और गांधी जी ने इस घटना से विचलित होकर सत्याग्रह आंदोलन स्थगित कर दिया था। नाटक में प्रशांत श्रीवास्तव, अभिनंदन, वर्षा तिवारी, जानू यादव, कृष्णा यादव, नीरज पाल, अमन सिंह, पंकज कुमार, रौनक, गौरव, मुकेश कुमार, गुलाब चंद्र, अक्षित गौर, यश तिवारी, सतीश चौहान, आदित्य रॉय, पुनीत कौशल, आकांक्षा तथा कृतिका आदि कलाकारों ने कार्य किया।
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